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हार जीत

  • kewal sethi
  • Mar 4
  • 3 min read

हार जीत


सेठ खुशहाल चन्द के यहॉं काफी चहल पहल थी। उस के विशाल बंगले के सामने विशाल उद्यान को बड़ी सुरुचि से सजाया गया था। नगर के सभी नामी गरामी नागरिक वहॉं पर आमंत्रित थे। एक ओर बड़े से स्टेज पर संगीत और नृत्य का कार्यक्रम चल रहा था। उस से थोड़ी दूर पर ही एक और बड़ा सा स्टेज था जिस पर एक सिंहासन जैसी कुर्सी पर सेठ खुशहाल चन्द का बेटा उमेश बेठा था। आज का यह समारोह उसी के लिये ही था। वह आज बारह वर्ष का हो गया था। उस की दोनों बड़ी बहनें उस के पीछे खड़ी थीं। चमकदार लिबास में वह कितनी आकर्षक लग रही थीं। लोगों का ध्यान जितना उमेश की तरफ था, उतना ही उस की बहनों की ओर था।

आगुन्तक जन कतार बन्द हो कर उस स्टेज पर आ रहे थे, हाथों में तरह तरह के उपहार ले कर। वह उपहार उमेश के लिये थे परन्तु उस की बहनें, उन को ले रही थीं और पीछे की मेज़ पर रख देती थी। सब कुछ बहुत ही शालीन तरीके से हो रहा था। उसी कतार में एक भव्य सा दिखने वाला व्यक्ति भी एक अत्यन्त सुन्दर गुलदस्ता हाथ में लिये हुये था। वह जब उमेश के पास पहुंचा तो उस की बहन ने गुलदस्ता लेने के लिये हाथ बढ़ाया पर उस ने देने से इनकार कर दिया। उस ने कहा कि यह बेटे के लिये है तथा उसी को दिया जाये गा। इस पर हुज्जत होने लगी तो बहन ने वह गुलदस्ता कुछ ज़ोर से लेने का प्रयास किया। इस हड़बड़ी में वह उस व्यक्ति के मुंह के सामने आ गया और उस की सुगंध से वह व्यक्ति गिर गया। उस के साथ ही उस से पीछे जो व्यक्ति था, उस ने अपने कुर्ते से रिवालवर निकाला और हाथ ऊपर उठा कर फायर कर दिया और चिल्लाया - खबरदार, जो कोई अपनी जगह से हिला। हम लड़के को साथ ले कर जा रहे हैं। अगर किसी ने रोकने की कोशिश की तो जान से हाथ धोना पड़े गा। मेरे साथी चारों ओर हैं।

वातावरण एक दम बदल गया। सब ओर चुप्पी छा गई। लोगों को जैसा अचानक अपने अपने स्थान पर मूर्ति बना दिया हो। सब अपना दम साधे खड़े थे। अब क्या हो गा, यह विचार सब के मन में था।

तभी उस रिवालवर वाले के हाथ पर एक ज़ोरदार वार हुआ और उस का रिवालवर गिर गया। साथ ही वार करने वाले उस आदमी ने कहा - ‘‘जगत सिंह, आज आये काबू में। अपने साथियों से कहो, अपने हथियार डाल दें वरना .....’’।

जगत सिंह - नगर बल्कि प्रान्त का दुर्दान्त गैंग लीडर। कौन सा अपराध था जो उस के गैंग ने नहीं किया गया हो। पुलिस के काबू में ही नहीं आ रहा था। वैसे वह रसूखदार था। नेताओं के साथ उस का उठना बैठना था। उस का एक धन्धा किडनैप करने का भी था।

पर यह दूसरा व्यक्ति कौन था? आवाज़ कड़कदार? पर था कौन। उमेश को उस की बहनें तुरन्त ले कर गायब हो गईं। सेठ और दूसरे नजदीक के रिश्तेदार इकठ्ठे हो गये। उस व्यक्ति ने कहा - मैं मंगल सिंह हूॅं - सी आई डी इंस्पैक्टर। हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि आज कोई वारदात होने वाली है, इस लिये हम लोग यहॉं पर थे। खुशी है कि मैं उस व्यक्ति के फौरन पीछे था जिस पर हमें जगत सिंह होने का शक था। आज पहली बार वह रंगे हाथों पकड़ा गया है। अब आप अपना समारोह फिर से आरम्भ कर सकते है।

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