विश्वबन्धु
विश्वबन्धु
अमरीका से निकलना कौन सा आसान होता है। बड़ी मुश्किल से आठ दस दिन का अवकाश तो मिल पाता है। इस छोटी सी अवधि में मॉं बाप को मिलो कि सुसराल जाओं या दोस्तों से मिलो। इस लिये कई मित्रों से मिले तो सालों गुज़र जाते हैं। ऐसे ही एक मौके पर विश्वबन्धु मिल गया। विश्वबन्धु अपने ही होस्टल में था। मुलाकात तो रोज़ होती थी। उस की एक खास आदत की वजह से वह याद में बना रहा था।
अजीब से माहौल था। हर छात्र इस तरह से पेश आता था जैसे उसे कोई चिन्ता न हो। आठ बजे मैस में खाना खाने के बाद मटरगश्ती, गपबाजी चलती थी रात के दस एक बजे तक। बेफिक्री का आलम था।
और उस के बाद? कमरे में बन्द हो कर पढ़ाई में जुट जाते थे रात के एक बजे, दो बजे तक। विश्वबन्धु ज़रा अलग था। रात नौ बजे ही वह सब कुछ छोड़ कर कमरे में चला जाता और बिजली गुल कर सो जाता। कुरेदने पर उस का जवाब होता - अर्ली टू बैड, अर्ली टॅ राईज़ वगैरा वगैरा। कब पढ़ता था, पता नहीं। हम तो सवेरे आठ बजे उठते तो वह तैयार मिलता। बताता, सैर कर के आ रहा हूॅं।
खैर, परीक्षा हुई और हम सब पास हो गये। इंटर्नशिप शुरू हो गई। उस वक्त हमारा फुरसत का समय अमरीका की यूनिवर्सिटियों के बारे में जानना तथा उन में दाखिले के लिये अर्ज़ी लगाना ही था। पर यहॉं भी विश्वबन्धु अलग था। कहता कि मैं तो देश प्रेमी हूॅं, यहीं रहूं गा और भारतीय परम्परा को आगे बढ़ाऊॅं गा। हमारे लिये यह अजीब सी बात थी। भारत में वह स्कोप कहॉं जो अमरीका में है।
तो मैं उसे मिला कई साल बाद। बीच बीच में खबर तो दूसरे दोस्तों से मिलती ही रहती थी। मिला तो पूछा - और क्या नई खबर?
- मैं शादी कर रहा हूं।
- वह तो तुम्हारी पुरानी आदत है।
ऐसा इस लिये कहा कि वह पहले भी तीन बार शादी कर चुका था। पर उस की किसी से बनी नहीं। कुछ सालों बाद और एक बार तो कुछ महीनों के बाद ही तलाक की नौबत आ जाती। वजह वही भारतीय परम्परा। घर देखो। सुसराल में रम जाओं। नौकरी करने में आपत्ति नहीं है पर घर तो उसे ही सम्हालना है। आज कल इतनी रूकावटें कहॉं चलती है। नतीजा मन मुटाव और फिर अलग होना। पर यह सब बाते कहने की थोड़ी हैं। पूछा
- तो इस बार होने वाली भाभी का क्या नाम है।
- अनुराधा।
- अनुराधा? यह तो तुम्हारी पहली बीवी का भी नाम था न?
- यह वही है।
- मतलब?
- उसी से शादी कर रहा हूॅं।
- दूसरी बार? और तलाक कब हो रहा है?
- अब की बार ऐसा कोई इरादा नहीं है।
- और भारतीय परम्परा को क्या हो गा?
- वह मूर्खता थी। औरत को भी अपना जीवन जीने का हक है। पति के साथ बंध कर नहीं रह सकती।
- और अनुराधा मान गई?
- कुछ वह बदली, कुछ मैं बदला बल्कि में अधिक बदला और हम एक पटरी पर आ गये।
- अब के कितने साल?
- यह तो जन्म जन्म का साथ है।
(विश्वबन्धु भारतीय परम्परा पर लौट आया)
- चलो, अच्छा हुआ। मुबारक हो। बेटी तो तुम्हारी पॉंच एक साल की हो गई हो गी।
- बहुत प्यारी बच्ची है।
- और अब आगे।
- तुम सुनाओं, कितना कमा लिया। एकाध कम्पनी अपनी अब यहॉं खोल लो।
- सोचता तो मैं भी हूॅं पर बीवी को मना नहीं पा रहा। उस का अपना काम है और बहुत व्यस्त रहती है।
- अपनी अपनी वैतरणी
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