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स्वप्न

  • kewal sethi
  • 2 days ago
  • 3 min read

स्वप्न


बस स्टैण्ड पर आटो रुका। सुन्दर सी लड़की उस में से उतरी। आटो चालक ने उस का सूट केस उतार कर नीचे रखा और अपना किराया ले कर चलता बना।

लड़की इधर उधर देख रही थी। नाईट बस थी और उसे भोपाल जाना था। सूटकेस ज़रा भारी था और वह थी नाज़ुक। उठाये कैसे।

एक लड़का पास ही खड़ा था। लड़की ने उसे पुकारा - ए मिस्टर, यह सूटकेस बस में रखवा दो।

लड़के ने कोई जवाब नही दिया। लड़की फिर बोली . ए मिस्टर, सुना नहीं क्या। यह सूटकेस बस में रख दो। मेरी बस मिस होने वाली है।

लड़के ने सूटकेस को देखा और फिर लड़की को। उस ने चुपके से सूटकेस उठा कर बस में रख दिया और अपना एक छोटा से एटैची भीं। इतने में लड़की बस में चढ़ गई और अपनी सीट पर जा कर बैठ गई।

लड़का भी उस के बगल वाली सीट 9 बी पर आ कर बैठ गया।

- अरे, तुम भी भोपाल जा रहे हो। चलो अच्छा है, वहॉं भी काम में आओ गे।

- पता है मेरे चाचा एस पी हैं। पुलिस के बड़े अफसर। वह तो उन की गाडी खराब हो गई, इस लिये आटो पर आना पड़ा।

लड़का अपने खयलों में खोया हुआ थां। उस ने कोई टीप नहीं की। सिर्फ हूॅं कर के रह गया।

पर लड़की को बोलने का शौक था शायद।

- जानते हो, मेरे पापा बड़े अफसर है गोवर्नमैण्ट में। पर तुम्हें क्या पता क्या हैं।

लड़के ने कुछ नहीं कहा।

- गूॅंगे हो क्या, बोलते कुछ नहीं।

कुछ देर वह चुप रही पर अधिक देर वह चुप नहीं रह सकी।

- उन्हों ने मेरे लिये बडा़ अच्छा लड़का देखा है। उसी से मिलने जा रही हूॅं।

- वह भी पुलिस में बड़ा अफसर है। आई पी एस में जो सब से बड़ी सर्विस है पुलिस की।

- जानते हो उस का नाम क्या है। आदित्य

कोई प्रतिक्रिया नहीं। लड़का कहीं दूर क्षितिज में देख रहा था।

- और घर में कोई नहीं। बस एक बूढ़ी मॉं। अब गई कि तब गई। फिर तो अपना की राज रहे गा।

- पर यह मानना हो गा कि है वह लक्की। मेरे जैसी सुन्दर लड़की भाग्य से ही मिलती है।

- आदित्य का मतलब जानते हो - सूरज

- वह सूरज, मैं सूरजमुखीं

- मेरा नाम ज्योति है। आदित्य की ज्योति। (और वह खिलखिला कर हंसी)

तब भी कुछ नही। आखिर एक तरफा डायलाग कब तक चलता। वह अपने सपनों में खो गई। पता नहीं कब सुबह हो गई और बस भोपाल पहुॅंच गईं। लड़की की ऑंख खुली। लड़का जा चुका था। मेरे सामान का क्या हो गा। कौन उतारे गा। जल्दी से उतरी।

वह लड़का खड़ा था। उस के हाथ में अटैची थी। तभी एक सब इस्पैक्टर ने आ कर उसे सैल्यूट किया।

- अकरम, तुम यहॉं।

- जी सर, वह अर्दली ने बताया कि मॉं की तबियत ठीक नहीं हैं। हम रात को ही उसे भोपाल ले आये। चिरायु में भर्ती करा दिया है। मैं वहीं से आ रहा हूॅं। डाक्टर ने कहा है कि चिन्ता की कोई बात नहीं। दोपहर तक ठीक हो जायें गी।

- शुक्रिया

- आप गैस्ट हाउस जायें गे। कमरा तैयार है।

- नहीं, पहले हस्पताल।

अकरम सब इंस्पैक्टर ने ड्राईवर को कहा - साहब को चिरायु हस्पताल ले जाओ। सीधे डाक्टर ए पी शर्मा के यहॉं।

गाड़ी रवाना हो गई।

- यह कौन थे। उस ने सब इंस्पेक्टर से पूछा

- आदित्य सर, ए एस पी।

ज्योति का चेहरा देखने लायक था। आदित्य, ए एस पी, बूढ़ी मॉं; अब गई, तब गईं।

सब इंस्पैक्टर अकरम भी हैरानी से उस का मुॅंह देख रहा था।

- क्या हुआ, मिस, कुछ छूट गया?

- मेरा सपना

तभी कलीनर आया - मैडम, जल्दी से अपना सूटकेस उतारो। गाड़ी स्टैण्ड पर लगानी है।

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