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आतंकवाद -- सच सरासर गप

kewal sethi
1 hour ago
3 min read

आतंकवाद

सच सरासर गप

अयोध्या से समाचार है कि राक्षसों ने फिर दण्डक वन में आक्रमण कर कुछ ऋषियों की हत्या कर दी और उन के आश्रमों को उखाड़ दिया। इस पर से अयोध्या के राजगुरू श्री वशिष्ट ने एक सख्त ब्यान जारी किया। उन्हों ने बिना लंका का नाम लिये हुए कहा कि एक पड़ोसी देश इन आतंकवादी राक्षसों को प्रोत्साहन देना समाप्त करे। उन्हों ने जम्बू द्वीप की सभी देशों से भी आग्रह किया कि वह इस बारे में इस पड़ोसी देश को सावधान करें।

लंका के राजकुमार मेघनाथ ने कहा है कि उन के देश का इन राक्षसों से कोई नाता नहीं है। पर वह यह नहीं चाहते कि आर्यवर्त में किसी राक्षस को बिना कारण परेशान किया जाये। उन्हों ने कहा कि राक्षस जाति कहीं भी हो, वह एक है। उन का यह भी कहना था कि यह अयोध्या का कर्तव्य है कि वह इन राक्षसों की माँग पर ध्यान दे और उन की भूमि पर जो आश्रम बनाये गये हैं, उन्हें हटा कर भूमि उन्हें लौटाने की व्यवस्था करे ताकि दोनों जातियॉं शाँति से रह सकें।

अयोध्या से प्राप्त समाचारों में कहा गया है कि नरम दल के शत्रुघन ने एक ब्यान जारी करते हुए कहा है कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। हमें अपने सारे मतभेद शाँतिपूर्वक ही निपटाना चाहिये। उन्हों ने रावण को अयोध्या आमंत्रित करने तथा उन से बात चीत करने की सलाह भी दी। उन्हों ने कहा कि आर्य जाति तथा राक्षस जाति वर्षों से एक दूसरे के साथ रह रही है। उन्हों ने यह भी कहा कि युद्ध में स्त्रियों और बच्चें को ही कष्ट होता है। उन का कहना था कि कुछ पक्ष बिना कारण जाति के नाम पर तनाव पैदा कर इस से राजनैतिक लाभ लेना वाहते हैं।

गरम दल के श्री लक्षमण ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि आर पार की लड़ाई लड़ी जाये चाहे इस के लिये सागर पर पुल बनाना पड़े। उन्हों ने कहा कि इस के लिये आत्मघाती दस्ते तैयार करने की आवश्यकता है। उन्हों ने लंका के राजकुमार की भर्त्सना करते हुए उन्हें इन राक्षसी कृत्यों को बढ़ाने के लिये दोषी करार दिया। उन का कहना था कि उन के धैर्य का बाँध अब टूटने ही वाला है। शत्रुघन के ब्यान पर उन्हों ने कहा कि यह राष्ट्र विरोेेधी व्यक्तव्य है और एक विदेशी महिला के इशारे पर कहा गया है जो अपने बेटे के माध्यम से राज्य पर आधिपत्य करना चाहती हैं।

महर्षि विश्वामित्र ने, जिन के आश्रम के पास यह घटना हुई थी, ने कहा कि यह दुख की बात है कि कुछ तत्व उन के आश्रम से ऋषियों के पलायन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और केवल शाँति का ही आवाहन कर रहे हैं। उन्हों ने परशुराम सहित अनेक व्यक्तियों से इस बारे में आग्रह किया है कि वह आतंकवाद रोकने में सहायता दें।

यह भी समाचार है कि महाराज दशरथ ने अपनी सैना को सावधान रहने को कहा है तथा उस की नियुक्ति राम चन्द्र जी के नेतृत्व में सीमा पर करने का मन भी बना रहे हैं। उधर बाली ने कहा है कि वह किसी भी सैना को अपने क्षेत्र से गुज़रने की अनुमति नहीं दें गे। उन का कहना है कि उन की रावण से संधि है और रावण ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह आतंकवाद में शामिल नहीं हैं। रावण के अनुसार कुछ असंतुष्ट ऋषि ही आतंक फैला रहे हैं तथा उन के देश को बदनाम कर रहे हैं।

अधिकतर लोगों का विचार है कि अयोध्या तथा लंका में युद्ध की प्रबल सम्भावना है। इस संदर्भ में देवताओं ने अपने प्रयास तेज़ कर दिये हैं।

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