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भला आदमी

  • kewal sethi
  • Jan 31
  • 2 min read

भला आदमी


वह भला आदमी था। सब उसे भला कहते थे तो भला ही हो गा न। हर किसी की मदद के लिेये तैयार। जान पहचान हो या न हो, कोई उसे कोई काम बता देता तो वह खुशी से करता। मौहल्ले के हर घर में उस का स्वागत होता था। हो गा भी क्यों नहीं। क्योंकि जब उसे कोई काम बता दिया जाता जैसे बाज़ार से दवाई लाना, बच्चे को स्कूल तक छोड़ आना। बैंक में पैसे जमा करा देना। वह कोई भी काम करने में देर न लगाता। उस का अपना काम क्या था, यह न किसी ने पूछा न ही पूछने की ज़रूरत ही समझी। अपने काम से काम, बाकी के श्री राम, मौहल्ले वालों का दस्तूर था।

अब सब से अधिक तो उस का सेठ करोड़ी मल के यहॉं जाने का रहता था। सेठ जी के कई तरह के व्यापार थे। बाज़ार में एक नहीं, तीन तीन दुकानें थीं। उन के यहॉं दस लोग काम करते थे पर उन का कहना था कि वह भला आदमी ही सब से ज़्यादा काम का था। भले आदमी ने कभी उन्हें निराश नहीं किया। किसी ग्राहक से पैसा वसूलना हो तो भला आदमी हाज़िर। कोई सौदा किसी दुकान से लाना हो तो भला आदमी हाज़िर। बच्चों को सरकस देखने जाना हो तो। मतलब कहने का यह कि वह तो घर का ही आदमी था।

पर एक कमी थी उस भले आदमी में। भुलक्कड़ था। किसी के यहॉं गया और उस ने कोई काम बताया तो भला आदमी उस में लग जाता और अपना काम, जिस के लिये वह घर से चला था, भल जाता। हाथ में कोई बरतन होता तो वहीं रह जाता। कोई लिफाफा जिसे वह किसी के लिये पोस्ट आफिस में पोस्ट करने जा रहा होता, वहीं रह जाता। फिर उस पड़ोसी को याद आता तो ले भी जाता। पर काम का आदमी था, इस लिये लोग बुरा नहीं मानते। कुछ न कुछ कमी तो सब में होती है पर कुल मिला कर तो वह भला आदमी था।

एक दिन उस ने सेठ जी के यहॉ फोन किया। अब घर में तो था नहीं, पब्लिक बूथ से ही किया। सेठ जी ने कहा - क्या बात है भाई, फोन करने की क्या ज़रूरतध्ं घर पर आ जाते।

भले आदमी ने कहा कि मैं ई डी आफिस जा रहा था, सोचा आप का बता दूॅं।

- इै डी आफिस क्यों?

- वह कुछ पैसे की ज़रूरत थी।

- ईडी आफिस बैंक है क्या, जो तुम्हें पैसा दे दे गा।

- गुप्त जानकारी देने पर वह ईनाम देते हैं न।

- कौन सी गुप्त जानकारी दे रहे हो उन्हें।

- वह आप की बेनामी सम्पत्ति का विवरण।

- क्या बकते हो। कुछ पैसे की ज़रूरत है तो यहीं आ जाओ।

- ज़रा ज़्यादा पैसे चाहिये।

- कितना?

- बस एक लाखं ही

- एक लाख? क्या बकते हो।

- यह तो पहली ही किस्त है, सेठ जी।

- और न दूॅं तो।

- इै डी आफिस वाले दें गे न।

- और दूॅं कैसे?

- वह बैंक की पास बुक भूल आया था आप के यहॉं, उस में जमा करा दो।

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