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निरीक्षण

kewal sethi
Sep 16
3 min read

निरीक्षण


एक बड़ी सी कार स्कूल के समाने रुकी। उस में से तीन व्यक्ति उतरे।

आईये आईये, अध्यापक ने बड़े तपाक से कहा। आप का स्वागत है

दल में तीन सदस्य थै। तीनों सूटिड बूटिड। अध्यापक को डराने के लिये काफी थे पर अध्यापक भी इतने कमज़ोर नहीं थे। बिल्कुल नहीं डरे बल्कि उन का हंस कर स्वागत किया।

- बच्चे कहां है?

- अपने घर पर हों गे, और इस धूप में कहां जा सकते हैं।

- यहां क्यों नहीं हैं।

- क्योंकि वह कहीं और हैं। वहां नहीं होते तो यहॉं होते या फिर कहीं और होते।

- यह दोपहर के खाने का वक्त है। खाना कहां है।

- अब कुर्सी तो दो ही हैं। कहां बैठ कर खाईय गा। चटाई पर ही बैठना हो गा, पर ठीक रहे गा क्या। क्रीज़ खराब तो नहीं हो जाये गी।

- हम अपने खाने की बात नहीं कर रहे, बच्चों के खाने की बात कर रहे हैं।

- लंच का समय है तो आप को भी भूख तो लगी हो गी। जो है वह बना कर देे सकता हूॅं।

- हम होटल तैमूर में खा कर आये हैं।

- वहॉं तो खाना बहुत महंगा होता है। कैसा था।

- बात टालो मत। हमारे खाने की बात नहीं करो। बच्चे क्यों खाना नहीं खा रहे।

- आप को किस ने कहा कि बच्चे खाना नहीं खा रहे। वह आराम से खा रहें हों गे।

- कहां?

- अपने घर में, और कहां।

- यहां क्यों नहीं?

- क्या आप ने कभी कच्चे चावल खाये हैं? नहीं न। उन्हें ढंग से उबाल कर खाना पड़ता है।

- यहां क्यों नहीं उबाल सकते।

- आज खाना बनाने वाली नहीं आई।

- क्यों?

- कल उस ने खाना खाया था तो पेचिस की बीमारी हो गईं। बेचारी डिस्पैंसरी से दवाई ले कर खा रही हो गी।

- बाकी अध्यापक कहां हैं?

- तीन है। एक रिपोर्ट ले कर शहर गया है। दूसरा घर पर खाना खाने गया है।

- तुम यहां क्या कर रहे हो।

- सर्कल साहब ने कहा कि कुछ मुस्टंडे आजकल गॉंव गॉंव घूम रहे हैं, निरीक्षण के बहाने। इस लिये किसी एक को हमेशा स्कूल में रहना चाहिये। न जाने कब आ धमकें। थोड़ी देर रुकें तो आप की भी उन से मुलाकात हो सकती है।

- क्या बकवास कर रहे हो। मुस्तंडे? हमीं हैं निरीक्षण करने वाले।

- आप तो मुस्टंडे नहीं लग रहे। फिर निरीक्षण क्यों करें गे।

- जानने के लिये कि आप लोग किस तरह सब को बेचकूफ बना रहे हो।

- पर आप यह सीख कर क्या करें गे। आप भी स्कूल चलाते हो क्या?

- हम जनता को बतायें गे कि हमारे स्कूलों की हालत कैसी है।

- जनता तो पहले से ही जानती है। उसे क्या बतायें गे।

- मेरा मतलब है हम प्रैस वालों को, टी वी वालों को बतायें गे।

- और वे किन को बतलायें गे। अपने पास जानकारी रखने से तो रहे। हज़म ही नहीं हो गी।

- वह जनता को बतायें गे, नेताओं को बतायें गे।

- मैं ने बताया न कि जनता तो पहले से जानती हैं और नेता भी। कोई नई बात करें।

- शिक्षा के नाम पर मज़ाक हो रहा है।

- मैं ने कही पढा था कि खेल खेल में शिक्षा अच्छी होती है। मज़ाक में भी अच्छी ही हो गी। पर आप यह खाने से शिक्षा पर कैसे आ गये।

- वही देखने आये थे पर न छात्र है न अध्यापक हैं, न खाना ही है। इस में शिक्षा कैसे हो गी।

- कल ज़रा जल्दी आ जाईये गा, सब मिल जायें गे। शायद खाना बनाने वाली भी आ जाये। कहिये तो मैं होटल तैमूर आ जाऊं, वहॉं पर खाने की बजाये नाश्ता कर के निकलें गे निरीक्षण करने। चार लोग तो कार में आ जायें गे।

- चलिये हज़ूर। आज का कोटा तो पूरा हो गया।

और वह तीनों कार में बैठ कर चल दिये। निरीक्षण वहीं रह गया।

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