witness in the box
गवाही
20 जुलाई को हुये पुलिस कार्रवाई की जॉंच करने के लिये एक पॉंच सदस्यीय समिति बनाई गई जिस में एक सर्वोच्च न्यायालय के जज, दो हाई कोर्ट के जज (तीनों सेवा निवृत), दो सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक थे। समय पा कर गवाहों को बुलाया जाने लगा। एक सिपाही रामपाल भी गवाहों में थे। उन का परीक्षण तथा प्रतिपरीक्षण की रिपोर्ट इस प्रकार है।
प्रश्न - नाम?
उत्तर - रामपाल
- पद
- कांस्टेबल नम्बर 347
- थाना
- आर टी एफ
- बीस जुलाई की घटना के बारे में क्या कहना चाहें गे।
- कुछ तत्व नीट में पेपर लीक के बारे में जन्त्र मन्त्र पर धरने पर बैठे थे। मेरी तथा आठ अन्य सिपाहियों की डयूटी जंत्र मंत्र पर 17 जुलाई से लगी थी। कई थानों से भी सिपाही बुलाये गये थे।
- कुल कितने सिपाही थे?
- मुझे जानकारी नहीं है।
- प्रदर्शनकारी कितने थे?
- संख्या तो नहीं पता पर काफी थे।
- पुलिस सिपाहियों से अधिक
- जी, बहुत अधिक और अगले दिन और बढ़ गये थे।
- उन का रवैया कैसा था।
- वह नारे लगा रहे थे और अधिकारियों को भला बुरा कह रहे थे।
- 20 जुलाई को क्या हुआ
- नारे लगाते हुये वह मार्च की तैयारी करने लगे।
- तुम उस वक्त कहां तैनात थे।
- मैं बैरियर के पास था।
- फिर क्या हुआ।
- उन लोगों ने बैरियर उखाड़ दिया और उस के दण्डों से हम पर हमला किया। कुछ प्रदर्शनकारी अपने साथ डण्डे भी ले कर आये थे। मेरे साथी को सिर पर चोट लगी।
- फिर तुम ने पैलेट गन चला दी।
- बिल्कुल।
- लाठी से क्यों नहीं रोका, पैलेट गन की क्या ज़रूरत थी।
- उस वक्त मेरे हाथ में वही हथियार था।
- पर तुम लाठी लेने जा सकते थे।
- जी, मैं उस वक्त ए सी कमरे में बैठ कर सीरियल नहीं देख रहा था कि होल्ड का बटन दबा कर अफसर के पास जाता कि मुझे गन की जगह लाठी दीजिये। वापस आ कर होल्ड का बटन फिर से दबाता और पुराने सीन पर पहुॅंच जाता।
- पर तुम जानते थे कि पैलट गन से किसी की आंख जा सकती है।
- बिल्कुल जानता था और यह यह पता था कि बाद में जॉंच हो गी जिस में तीन तीन जज जिन्हों ने कभी सात आदमियों को एक जगह हल्ला मचाते हुये नहीं देखा हो गा, उग्र भीड़ की बात अलग है, जॉंच करें गे।
- ज़रा तमीज़ से बात करो, यह अदालत है।
- जी हज़ूर, यह अदालत तो नहीं है पर अदालत का नशा ज़रूर है।
- तुम्हें पैलेट गन चलाने का कोई अफसोस नहीं है।
- बहुत अफसोस है। काश मेरे हाथ में रिवालवर होता तो मैं गोली चला सकता।
- तुम जानते हो कि तुम्हारी नौकरी जा सकती है।
- जी, फिर मैं भी काकरोच बन जाऊं गा और किसी का भी सिर फोड़ सकूॅं गा। और सभी नामी वकील तथा जज मुझे मिसगाईडिड यूथ कह कर मेरी तरफदारी करें गे।
- ज़रूरत से ज़्यादा बल इस्तेमाल करना खिलाफ कानून है।
- किसी की रक्षा के लिये किसी की जान लेना कानून मे जायज़ है।
- आगे बात करना फज़ूल है। साफ है कि इसे अपने किये पर कोई अफसोस नहीं है। इसे जाने दें।
- तुम जा सकते हो।
-शुक्रिया हज़ूर।
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