तारा बाली संवाद
- kewal sethi
- 18 hours ago
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तारा बाली संवाद
एक दूत ने आ कर समाचार दिया कि सुग्रीव नगर के बाहर खड़ा है तथा बाली को मल युद्ध के लिये ललकार रहा है।
वाली - ठीक है। सुग्रीव को जा कर सूचित कर दो कि बाली मल युद्ध के लिये तैयार है।
तारा - स्वामी, एक बात कहूॅं। सुग्रीव अभी दो रोज़ पहले ही मल युद्ध में हार कर जान बचा कर भागा है। और वह भी इस लिये कि भाई की हत्या आप को स्वीकार नहीं थी।
वाली - इस बार वह बच कर नहीं जा पाये गा। एक बार अपराध क्षम्य है पर बार बार वही अपराध करना क्षमा योग्य नहीं रह जाता।
तारा - वह बात नहीं है। मुझे इस में षड्यन्त्र की बू आती है। वरना अभी तो उस के ज़ख्म भी नहीं भरे हों गे।
वाली - किस प्रकार का षड्यन्त्र?
तारा - मुझे बताया गया है कि सुग्रीव को एक मित्र मिला है जो किसी दूर देश से आया है। उस के साथ उस का उठना बैठना है। शायद वे दोनों मिल कर युद्ध करें।
वाली - खबर तो मुझे भी है पर यह भी बताया गया है कि वह आर्य है। आर्य से धर्म पालन की उम्मीद की जाती है। दोनो का एक साथ युद्ध करना नियम विरुद्ध है किन्तु यदि वह अलग अलग मलयुद्ध के लिये आयें गे तो उस के लिये मैं तैयार हूॅं।
तारा - मलयुद्ध में, स्वामी, आप को नहीं जीता जा सकता, यह मुझे ज्ञात है पर आर्य मलयुद्ध के योग्य नहीं हैं। वह आखेट भी हथियारों से करते हैं। ऐसे में सावधान रहना आवष्यक है।
वाली - जानवरों का शिकार करना और बात है परन्तु मनुष्य का शिकार पूर्णतया वर्जित है। मुझे विश्वास है कि आर्य भी इस नियम को जानते हैं तथा इस से बंधे हुये हैं।
तारा - आप भूलते हैं कि रावण को भी धनुष बाण का ज्ञान है। और उस ने उस का प्रयोग दुश्मनों के प्रति किया है।
बाली - जब विरोधी भी धनुष बाण का प्रयोग करें तो यह स्वीकार्य हैै। इस में कोई दो राय नहीं हैं।
तारा - पर क्या यह सभी जातियों को स्वीकार्य है।
वाली - तुम्हें याद हो गा कि जब रावण ने ललकारा था तो उस ने धनुष बाण का नहीं, मलयुद्ध को ही स्वीकार किया था। यह सार्वजनिक नियम है। रावण उस में परास्त हुआ पर फिर भी हथियारों की बात नहीं आईं। उस ने हमारे क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने का वायदा किया और आज तक वह इस वायदे को निभा रहा है।
तारा - वह तो मैं जानती हूॅं किन्तु सुग्रीव पर मेरा विश्वास नहीं है। और उस के आर्य मित्र पर तो कतई नहीं।
बाली - मैं नहीं समझता कि आर्य इस नियम को नहीं मानें गे। हां, यह अवश्य है कि इस बार सुग्रीव को भागने नहीं दिया जाये गा, उसे पकड़ कर ही लाना पड़े गा ताकि उस की चुनौती को पूर्णतया समाप्त किया जा सके। तुम निश्चित रहो, जीत तुम्हारे स्वामी की ही हो गी।
तारा - भगवान करे, ऐसा ही हो पर मेरा हृदय शंकित है।
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