top of page

दिल का चैन, इक तलाश

  • kewal sethi
  • Jul 15, 2025
  • 1 min read

27-2-89 शामं


दिल का चेन, इक तलाश

{मेरे मित्र की एक और नज़्म}


यह नहीं है वह मुद्हा जिस की है तुझ को है तलाश।

यह नहीं है वह जगह जो आये तुम को रास।।

ये पानी नहीं है वह पानी न कर इस की तू आस।

यह नहीं है वह शह जो बुझा सके तेरी प्यास।।

ये नहीं दर असल फूल जो तुझे फूल नज़र आयें।

ये तो हैं वह खार हैं जो तुझे फूल नज़र आयें।।

यह है गैरों की मजलिस जिस में अपनापन दिखे।

ये नहीं तेरा घर जो तुम्हें घर सा है दिखे।।

धोका ही धोका है जो हर तरफ नज़र आये।

बल्कि हकीकत का है तसुव्वर जिसे केाई नहीं पाये।।

उठ भाग खड़ा हो, निकल कर यहॉं से।

कि दुश्मन है यहॉं सब लोग तेरी जान के ।।

मत भूल तुझे ठगने की तरकीब।

करते हैं सहरो शाम जो हैं तेरे रफीक।।

यह सब गलत हो जायें गे, जो लगते हैं आज ठीक।

दुरस्त है कुछ और ही शै है जो लगती है ठीक।।

समेट ले अपना बिस्तर जो तू भला चााहे।

वरना निगल जायें गे तुझ का अपने ही साये।।

यह महल यह साज़ो ऐशो इशरतो आराम के सामॉं।

हकीकत में हैं क्या तुम्हें देर से हो गा अयॉं।।

तब तक बहुत देर हो चुकी हो गी ए मेरे दिल।

जाग ले अपनी नींद से न कर देर ए गाफिल।।

किनाराकश हो गर सकून को पाना है तेरा मुद्हा।

कि बस सब कुछ मिलता है यहॉं सकून के सिवा।।


गिरधारी लाल नारंग

 
 
 

Recent Posts

See All
कौन मरा

कौन मरा मेरा दोस्त अपनी कार बहुत तेज़ चलाता है। वास्तव में पूछा जाये तो वह तेज़ नहीं रैश चलाता है। पर उस दिन जब उस ने अचानक कार को ब्रेक मारी तो मेरा सर सामने डैश बोर्ड से टकराते टकराते बचा हांलाकि मैं

 
 
 
चंगेज़ खान - 5

चंगेज़ खान - 5 चिनगीज़ खान जब अवर्गा लौटा तो उसके बाद इतनी लूट की सामग्री थी कि उसे संभालना मुश्किल था। उस के लिपिक दिन रात एक कर के सूचिया बऩा रहे थे पर उस में भी समय लग रहा था। समझ में नहीं आ रहा था क

 
 
 
बच्चों के साथ रेल तथा अन्य यात्रायें

बच्चों के साथ रेल तथा अन्य यात्रायें एक बच्चों की मौसी मुरादाबाद में रहती थी। मौसा लोक निर्माण विभाग में थे। लांग वीक एण्ड वहॉं जाया जाये, यह सोचा। मौसा का इत्तलाह भी कर दी। शुक्रवार सुबह जब स्टेशन आय

 
 
 

Comments


bottom of page