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कत्ल के बाद

Jan 14
2 min read

कत्ल के बाद


आई जी साहब की प्रैस वार्ता चल रही थी।

उन्हों ने फरमाया - आप को जान कर खुशी हो गी कि हैड कॉंस्टेबल मथुरा दास के कत्ल की गुत्थी हम ने चार दिन में ही सुलझा ली है। शौकत और हर दीप को गिरफतार किया गया है और उन्हों ने गुनाह कबूल भी कर लिया है। उन की निशानदेही पर जो चाकू जुर्म में इस्तेमाल हुआ था, वह भी बरामद कर लिया गया है।

एक पत्रकार ने पूछा - क्या लाश मिल गई है।

आई जी ने बताया कि अभी लाश नहीं मिल पाई है। मुलज़िमान आना कानी कर रहे हैं। हम ने मैजिस्टेट से तीन दिन का पुलिस रिमाण्ड मॉंगा है, उम्मीद है कि लाश मिल जाये गी। इस बीच हम ने सब इंस्पैक्टर हरनाम सिंह को उन के बेहतरीन काम के लिये पॉंच सौ रुपये ईनाम देने का फैसला किया है। हैड कॉंस्टेबल खुमान को दो सौ रुपये ईनाम दिया जाये गा और उस के आउट आफ टर्न प्रमोशन के लिये भी सिफारिश कर रहे हैं।

तीन सप्ताह बाद

मैजिस्टेट की अदालत में आवाज़ लगाई गई - सरकार बनाम मथुरा दास हाज़िर हो। मुलज़िमान को पेश किया गया। पर एक और व्यक्ति भी आ गया।

मैजिस्टेट - तुम कौन हो।

व्यक्ति - जी, मथुरा दास

मैं. - मथुरा दास कौन

व्यक्ति - हैड कॉंस्टेबल

- थाना

- पिपरिया

- तुम बनखेड़ी गये थे।

- जी हज़ूर

- किस तारीख को

- 16 जून को, हज़ूर

- फिर क्या हुआ।

- जी मैं, तफतीश के बाद पिपरिया लौट आया। वहॉं मुझे इत्तलाह मिली कि मेरे भॉंजे की हालत नाज़ुक है। मैं उस देखने चला गया।

- बिना किसी को बताये?

- हज़ूर, आखिरी बस छूटने ही वाली थी। उतना वक्त नहीं था कि किसी को बता पाता।

- तुम्हारा भॉंजा मर गया या ज़िंदा है।

- हज़ूर, माई बाप। तीन हफते मौत और ज़िंदगी के बीच झूलता रहा पर बच गया।

मैजिस्टेट (सरकारी वकील से) - यह क्या है।

वकील - सर, मैं तफतीश कराता हूॅं। दो दिन की मोहलत दी जाये।

मैजिस्टेट - ठीक है। परसों तक केस मुलतवी।

शौकत - हज़ूर, हमारा क्या हो गा। मथुरादास तो ज़िंदा है।

मैजिस्टेट - परसों फैसला हो गा कि मथुरा दास ज़िंदा है या मुर्दा। (रीडर से) - अगला केस


(यह कहानी नहीं हकीकत है, पर नाम बदल दिये गये हैं)

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निरीक्षण

निरीक्षण एक बड़ी सी कार स्कूल के समाने रुकी। उस में से तीन व्यक्ति उतरे। आईये आईये, अध्यापक ने बड़े तपाक से कहा। आप का स्वागत है दल में तीन सदस्य थै। तीनों सूटिड बूटिड। अध्यापक को डराने के लिये काफी थे

 
 
 
एफ बी पी

एफ बी पी - क्यों राम गोपाल जी, यह सुबह सुबह चटाई ले कर कहॉं जा रहे हो। योग वगैरा शुरू कर दिया क्या। - अखबार पढ़ा करो अखबार। दुनिया की कुछ खबर रहे। - क्यूं क्या हो गया दुनिया को। कल शाम तक तो अच्छी भली

 
 
 
witness in the box

गवाही 20 जुलाई को हुये पुलिस कार्रवाई की जॉंच करने के लिये एक पॉंच सदस्यीय समिति बनाई गई जिस में एक सर्वोच्च न्यायालय के जज, दो हाई कोर्ट के जज (तीनों सेवा निवृत), दो सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक थे। समय

 
 
 

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