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आरसी का आदमी

kewal sethi
Jul 16, 2021
1 min read

आरसी का आदमी

कामयाबी जब कभी चूमे कदम तुम्हारे

दुनिया चाहे इक रोज़ बादशाह बना दे

आरसी के सामने खड़े हो आदमी को देखना

और सुनो गौर से कि क्या है वह कह रहा

शोहरत माॅं बाप बीवी के म्याद पर उतरे पूरी

क्या ख्यालात हैं उन के यह है गैर ज़रूरी

आरसी से झलकते चेहरे का पैगाम आखिरी

उस पर ही पूरी मुनहसर है आकबत तुम्हारी

उसे खुश रखो गे तो ज़रूरत नहीं किसी की

वही रहे गा साथ तुम्हारे जब हो सांस अखिरी

जब बढ़ जाये मुध्किलात उसी का सहारा है

वही है इक दोस्त जो हर वक्त तुम्हारा है

इठलाते रहो भले ही वक्त के साथ सदा

थपथपाते रहो अपनी पीठ खुद ही भला

किस्मत में तुम्हारेी हो गे आॅंसू और पछतावा

अगर आरसी के आदमी को दिया जो धोका

(आरसी - मिरर)


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