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काकरोच गाथा

kewal sethi
Aug 15
1 min read

काकरोच गाथा


कुछ याद उन्हें भी कर लो जो रहते तुम्हारे साथ

रक्षा करते हैं तुम्हारी और सम्पत्ति की दिन रात

उन के भी तो घर है, उन के भी हैं बीवी बच्चे

पर अपने कर्तव्य के प्रति सदैव रहते हैं वह सच्चे

बैरियर तोड़ते, पत्थर फैंकते जो आगे आगे आते

जब सामना हो हुड़दंगो से तो उन से तुम्हें बचाते

सपान्सर तो इस मौके पर अपने बिलों में घुस जाते

बाहरी तत्व आ गये कहीं से यह वह बहाना बनाते

जख़मी हुये जो इन पत्थरों से उन का भी ध्यान करों

अपना कर्तव्य पूरा करते जो उन का तुम सम्मान करो

हम भी सरकारी नौकर थे कभी इसे मत भूल जायें

शॉंति की रक्षा में हम ने भी तो सब नुस्खे थे अपनाये

सरकार की राजनीति से नाराज़ है, उस का अपना स्थान

पुलिस वाले अपनी डयूटी करते उन का तो करो सम्मान

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