शीर्षक बाद में
- kewal sethi
- Mar 6
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शीर्षक बाद में
- हसरत है बस यही कि वह इक बार तो देख ले
-- ज़रा ठीक से बताओ, तुम्हारी पेंण्टिंग को कि तुम्हें
- मुझ नाचीज़ में वह बात कहॉं जो है इस चित्र में
-- दिल को सम्भालो गे तो आये गी जान चित्र में
- ज़रा देखो तो कि यह ऑंखें हैं कितनी जादू भरी
-- वह तो ठीक हैं पर बनाई हैं क्यों भला इतनी टेढ़ी
- ज़रा ऑख भर कर देखो कितने खूबसूरत हैं रुखसार
-- लाल रंग ज़रा ज़्यादा ही बना दिया है चमकदार
- यह होंठ कितने नाज़ुक हैं इस के बोल हों गे मीठें
-- ज़रा मोटाई इन की कम होती तो लगते यह अच्छे
- अजीब अहमक हो तुम्हें दिखती नहीं कोई अच्छाई
-- मेरी मानो तो यह पेंण्टिंग छोड़ अपनाओ फोटोग्राफी
- वाहियात है वह धन्धा, रखा हैं इस में दिल को उण्डेल
-- लाईट सही हो, फोकस ठीक तो फोटो आये गी बे मेल
- न बाबा, उस में भी तुम्हें नज़र आये गी कितनी ही कमी
-- कहें कक्कू कवि क्रिटिक प्यारे की यही तो रहती खूबी
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