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व्यापम की बात

kewal sethi
Apr 28, 2025
2 min read

व्यापम की बात - मुकाबला


व्यापम में एम बी ए के लिये इण्टरव्यू थी

और साथ में उस के थी ग्रुप डिस्कशन भी

सभी तरह के एक्सपर्ट इस लिये थे बुलाये

कुछ प्रशासक भी थे, कुछ प्राध्यापक भी आये

हमें भी इस के लिये न्यौता मिल गया

सब से बात करने का मौका मिल गया

इस का हाल ब्यान करने का आया विचार

इस लिये पेश हैं आप के सामने कुछ इश्हार


कौन किस पर भारी था, यह सवाल था

दोनों तरफ बराबर का ही हाल था

यह अगर जवाब देने से लाचार थे

वह सवाल पूछने की आदत का शिकार थे

कुछ सवाल ऐसे थे जिन का था न कोई जवाब

कई लोग ऐसे थे कि जिन का ज्ञान था लाजवाब

ग्रुप डिस्कशaन का तो अपना ही आलम था

न थी कोई जानकारी पर बोलने का अरमान था

वलवले थे दिल में कि अपनी बात सुनायें गे

न हों गे तर्क नये तो पुराने ही दौहरायें गे

कुछ एक्सपर्ट भी पीछे नहीं थे अपने विचार बताने में

उन्हें भी तो शौक था काफी मुद्दत से बितयाने का

प्रत्याशी से लड़ने को तैयार कुछ ऐसे भी थे

जो जवाब वह चाहते थे वह जवाब वैसे न थे

कुछ का ख्याल था कि प्रत्याशी को समझायें

किस तरह जिंदगी में जीना है तफसील से बतायें

कुछ प्रत्याशी भी पूरी तरह तैयार हो कर आये

इस तरह के जवाब देते कि कहीं फंस न जायें

गर पढ़ाई पर बात करें तो उन की थी यह फरियाद

इतने माह बीत गये अब किसे है यह सब याद

जिन का इम्तहान सर पर था, उन का था यह बहाना

अभी तो शुरू ही किया है समझना और समझाना

कुछ सोचते थे, किस तरह से इन्हें फुसलायें

इधर उधर की बात कर दिल इन का बहलायें

गरज ़यह कि मुकाबला दिलचस्प था क्या कमाल था

किस तरह से तालीम चल रही है इस की मिसाल था

कुछ एक्सपर्ट करते थे याद अपने गुज़रे ज़माने को

गिरते हुये मयार से परेशान कोसते नये ज़माने को

बातें और भी हैं इस तरह की, अब याद भी नहीं

हर ज़माने की अपनी खूसिसयत है होती है बात नई

बदलते हुये ज़माने के साथ ही चलें गे कक्कू कवि

अगले साल भी ज़रूर आयें गे न्यौता मिले तो सही

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