पति, पिता और वह
- kewal sethi
- 2 days ago
- 1 min read
पति, पिता और वह
बेटी - डैडी, मैं घर छोड़ कर जा रही हूॅं।
पिता - बहुत अच्छा कर रही हो। मैं भी जा रहा हूॅं।
- क्यों? आप क्यों?
- जिस कारण तुम, उसी कारण मैं भी
- मैं तो भाभी के कारण जा रही हूॅं
- मैं भी तुम्हारी भाभी के कारण जा रहा हूॅं
- पर आप रहो गे कहॉं
- जहॉं तुम रहो गी, वहीं।
- मैं तो अपने होने वाले पति के साथ जा रही हूॅं
- तो क्या। पिता और पति में क्या झगड़ा है। एक स्वर ही तो इधर उधर होता है।
- स्वर की बात तो बहुत है, आप को पता है, एक नुकते से खुदा जुदा हो जाता है
- वह उर्दू की बात है, मैं हिन्दी की बात कर रहा हूॅं
- पर वह माने गा क्या?
- तुम कहो गी तो कैसे नहीं माने गा। पति की नहीं, पत्नि की ही चलती है। अब देखो तुम्हारे भैया भाभी की मानते हैं कि नहीं।
- वही तो दिक्कत है
- दिक्कत नहीं, यह कायदा है। जब तुम्हारी मॉं थी तो क्या मैं उस का कहा नहीं मानता था
- वह न कह दे तो
- पति में न होता ही नहीं। पत्नि में ही न होता है। और सुनो, पत्नि जब आती है तो पति का आधा त मतलब ताव ले लेती है। और अपना न जोड़ लेती है।
- फिर भी वह न कहे तो
- तब वह तुम्हारे लायक नहीं। दूसरे की तलाश करो
- बात कर के देखती हूॅं
Comments