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पति, पिता और वह

  • kewal sethi
  • Jun 4
  • 1 min read

पति, पिता और वह


बेटी - डैडी, मैं घर छोड़ कर जा रही हूॅं।

पिता - बहुत अच्छा कर रही हो। मैं भी जा रहा हूॅं।

- क्यों? आप क्यों?

- जिस कारण तुम, उसी कारण मैं भी

- मैं तो भाभी के कारण जा रही हूॅं

- मैं भी तुम्हारी भाभी के कारण जा रहा हूॅं

- पर आप रहो गे कहॉं

- जहॉं तुम रहो गी, वहीं।

- मैं तो अपने होने वाले पति के साथ जा रही हूॅं

- तो क्या। पिता और पति में क्या झगड़ा है। एक स्वर ही तो इधर उधर होता है।

- स्वर की बात तो बहुत है, आप को पता है, एक नुकते से खुदा जुदा हो जाता है

- वह उर्दू की बात है, मैं हिन्दी की बात कर रहा हूॅं

- पर वह माने गा क्या?

- तुम कहो गी तो कैसे नहीं माने गा। पति की नहीं, पत्नि की ही चलती है। अब देखो तुम्हारे भैया भाभी की मानते हैं कि नहीं।

- वही तो दिक्कत है

- दिक्कत नहीं, यह कायदा है। जब तुम्हारी मॉं थी तो क्या मैं उस का कहा नहीं मानता था

- वह न कह दे तो

- पति में न होता ही नहीं। पत्नि में ही न होता है। और सुनो, पत्नि जब आती है तो पति का आधा त मतलब ताव ले लेती है। और अपना न जोड़ लेती है।

- फिर भी वह न कहे तो

- तब वह तुम्हारे लायक नहीं। दूसरे की तलाश करो

- बात कर के देखती हूॅं

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