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पूर्ववत

kewal sethi
Jul 12
2 min read

पूर्ववत


पति पत्नि घूमने बाज़ार में निकले। रास्ते में मिल गई एक लड़की। उस समय जो बात चीत हुई वह प्रस्तुत है। प पुरुष है, स पत्नि तथा म दूसरी लड़की।

प - कहो माधवी, कैसी हो।

म - बिल्कुल फर्स्ट क्लास। तुम कैसे हो।

प - इन से मिलो, मेरी पत्नि सुधा। सुधा, यह मेरी गर्ल फ्रैण्ड थी। थी, है नहीं।

स - क्यों, क्या हो गया।

प- इस ने भाव ही नहीं दिया। क्या करता।

म- तुम थे ही उसी लायक।

प - और तुम्हारे पति कैसे हैं।

म- तुम से तो अच्छे ही हैं।

स - यह तो हो ही नहीं सकता, पदम तो लाखों में एक है।

म - मैं भी इसी मुगालते में थी पर समय रहते बच गई।

स - अच्छा हुआ, तुम बच गईं। वरना मैं क्या करती।

प - जो हुआ, सो हुआ। यह बताओ कि इस शनिवार की शाम को क्या कर रही हो।

म - अपनी पत्नि के सामने ऐसे पूछ रहे हो। क्या इरादा है।

प - इस में क्या गलत पूछ लिया मैं ने।

म - और सुधा, तुम्हें इस ने बताया कभी मेरे बारे में।

स - ऐसी बातें पूछी थोड़ी जाती हैं। न ही बताई जाती हैं। गुप्त ही रहें तो ठीक रहता है।

म - वही तो, गुप्त ही रहना चाहिये। पर फिर से जताना तो सही नहीं है न।

स - इस में गलत क्या है। इतने समय बाद मिली हो तो बात चीत के लिये समय तो चाहिये न।

म - न बाबा न, मैं अकेली ही भली।

प - अकेली क्यों, क्या पति साथ नहीं रहते।

म - मेरा मतलब था, तुम से दूरी ही भली।

स - पुराने मित्रों में दूरी सही नहीं होती। मिलते रहना चाहिये।

म - तुम भी? पर शनिवार की शाम को तुम क्या कर रही हो।

स - अभी तक तो कोई प्रोग्राम नहीं था। पर सब तुम्हारे जवाब पर निर्भर है।

म - यानि पदम का मुझ से मिलने पर कोई एतराज़ नहीं हैं तुम्हें।

स - बिल्कुल नहीं।

म - यानि तुम भी प्रोग्राम की सोच रही हो।

स - सही कहा। सोच तो रही थी।

म - क्या प्रोग्राम रहे गा।

स - तुम्हारा और तुम्हारे पति का इंतज़ार। आओ गी न।

म - ऐसा है तो आना ही पड़े गा।

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