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नीना — भाग दस

  • kewal sethi
  • Oct 6, 2024
  • 1 min read

नीना

17. उपसंहार

उपरोक्त घटना को एकाध साल बीत गया था।

लाल साहब अपनी बैठक में बैठे अखबार पढ़ रहे थे। तीन दिन से एक ही खबर अखबारों में छाई हुई थी। एक महिला की लाश एक फलैट में पाई गई थी। महिला की शनाखत नहीं हो पाई थी क्योंकि कोई कागज़ पत्र उस के पास नहीं पाया गया था। उस मकान का मालिक भी लापता था। पुलिस उस की तलाश कर रही थी।

लापता लाश किस की थी। हत्या क्यों हुई। इस पर सभी रिपोर्टर अपने अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। लापता लाश के नाम पर लाल साहब को कमल की याद आ गयी।

पर वह मामला तो ठण्डे बस्ते में था, शायद यह भी चला जाये।


उस वक्त एक व्यक्ति ने उन की बैठक में प्रवेया किया। सलाम करने के बाद उस ने बताया कि वह अनुभव इण्डस्टीज़ से आया है। वह वहॉं पर सुरक्षा अधिकारी है।

उस ने बताया कि वह उन्हें निमन्त्रणपत्र देने आया है। अगले सप्ताह उन के उप प्रबंधक की शादी है और उन्हों ने खास तौर पर उन्हें आने का अनुरोध किया है।

निमन्त्रणपत्र देखा - लिखा था - अशोक और नीना के विवाह के उपलक्ष में होटल वृन्दावन में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया है। आप की उपस्थिति प्रार्थनीय है।

लाल साहब को हैरानी नहीं हुई। यह तो होना ही था।

उत्सुकतावश उन्हों ने कुछ अतिरिक्त जानकारी के लिये आगुन्तक से पूछने का मन बनाया। पहला प्रश्न था - आप का नाम

करमा - आगुन्तक ने कहा।

करमा? सुरक्षा अधिकारी? चौंक गये लाल साहब।


 
 
 

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