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चंगेज खान - 3

kewal sethi
Feb 10
10 min read

चंगेज खान

तृत्रीय अध्याय

तेमुजिन तथा जेमुका दोनों ही अपने अपने तौर पर खान थे किन्तु दोनों ओंग खान के आधीन ही माने जाते थे। ओंग खान की आयु काफी हो गई थी और यह स्पष्ट नहीं था कि उस के पश्चात मंगोल जाति का सर्वोच्च नेता कौन हो गा। तेमुजिन ने इस बात का तय करने के लिये एक प्रस्ताव किया कि उस के बेटे जोची की शादी ओंग खान की बेटी से करा दी जाये तो यह स्पष्ट हो जाये गा कि उत्तराधिकारी कौन हो गा। उस ने ओंग खान को सन्देश भिजवाया किन्तु ओंग खान ने साफ इंकार कर दिया क्योंकि वह तेमुजिन को नीची जाति का मानता था।

इंकार तो कर दिया परन्तु ओंग खान को लगा कि तेमुजिन चुप नहीं बैठे गा और उस की शक्ति का उसे पता था। इस कारण उस ने एक सन्देश भिजवाया कि वह शादी के लिये तैयार है। उस की योजना थी कि वह तेमुजिन कोे खत्म कर दे गा और निष्कंक हो जाये गा। उस ने तिथि एवं स्थान भी तय कर दिय जहॉ पर रस्म अदा की जाये गीा। तेमुजिन अपने परिवार के साथ उस स्थान के लिये रवाना हो गया। ओंग खान उसे के पिता का अन्दास था और तेमुजिन के पिता तुल्य था अतः उसे शक नहीं हुआ। उस के साथ गिने चुने सिपाही ही थे। जब वह नियत स्थान से एक दिन की दूरी पर था तो उसे ओंग खान के इरादे का पता चला। उस समय स्पष्टतः ही वह युद्ध करने की स्थिति में नहीं था। इस कारण उसने अपने सभी साथियों को तितर बितर होने के लिये कहा और स्वयं पूर्व की ओर भागा। उस समय उस के साथ केवल गिने चुने व्यक्ति ही थे। मेरकिड कबीले के आक्रमण के बाद यह पहला मौका था जब सामाजिक स्तर पर तथा सामरिक स्तर पर वह पिछड़ गया था। ओंग खान की सैना ने पीछा किया किन्तु तेमुजिन बचते हुये चला। उस समय उस के कुछ साथी ओंग खान के या जेमुका के साथ हो गये। भूखे प्यासे तेमुजिन तथा उस के साथी भागते रहे। पर संयोग से एक घोड़ा मिल गया । उस के मांस से ही काम चलाया और नदी का अशुद्ध पानी पिया। बालजुना की झील के किनारे इस घोड़े के आने को उन्हों ने एक शुभ संकेत माना। उस समय तेमुजिन के साथ केवल उन्नीस व्यक्ति थे जो नौ अलग अलग कबीलों से थे। वे अलग अलग धर्मों के भी थे।

वापस लौट कर तेमुजिन ने अपनी सैना को इकठ्ठा किया और उस की सैना तेज़ी से ओंग खान की ओर बढ़ी जो अभी तेमुजिन पर जीत का जशन मना रहा था। इस के लिये तेमुजिन ने सीधा रास्ता न ले कर एक कम इस्तेमाल में आने वाला तथा दुर्गम रास्ता चुना। ओंग खान पर अचानक हमला हुआ तथा तीन दिन के युद्ध के पश्चात उस की सैना की करारी हार हुई। उस के सिपाही अलग अलग दिशा में भाग खड़े हुये। ओंग खान का बेटा दक्षिण की ओर गया और वहीं उस की मृत्यु हो गई। ओंग खान स्वयं जान बचा कर नाईमन कबीले के इलाके की ओर भागा। नाईमन कबीला मंगोल जाति में तीसरा बड़ा कबीला था। जेमुका भी उसी ओर अपनी सैना के साथ भागा। नईमान कबीले तक ओंग खान पहुॅंच तो गया परन्तु वह उस समय अकेला था। उसे किसी ने पहचाना नहीं और उस की हत्या कर दी गई।

नाईमन कबीले का मुखिया त्यांग खान था। वह काफी आयु का था परन्तु उस के पास काफी सैनिक थे। उस समय तेमुजिन के साथ सैनिक संख्या में काफी कम थे, इस कारण तेमुजिन ने एक चाल चली। उस ने प्रत्येक दल को पॉंच जगह अलग अलग अलाव जलाने को कहा। इस से दुश्मन को लगा कि तेमुजिन के पास काफी सैनिक हैं। वर्ष 1204 में बंरखान खलदून के 500 किलोमीटर पश्चिम में युद्ध हुआ। जिस में तय होना था कि मंगोल जाति का सर्वोच्च नेता कौन हो। इस में तेमुजिन ने सीधा हमला करने के बजाये छोटे छोटे समूहों में सैना को बॉंट कर अलग अलग दिशा कर आाक्रमण किया। हमला कर दुश्मन को नुकसान पहुंचा कर वह अलग अलग दिशा में भाग लेते जिस से नाईमन सैनिक उन का पीछा भी नहीं कर सके। एक दूसरा तरीका अपनाया गया कि एक लाईन विरोधी सैना पर तीर चला का भाग लेतीं, उस के पीछे दूसरी लाईन वही काम करती। इस से नाईमन सैना को काफी बड़े क्षेत्र में बंटना पड़ा। यह पुराने ज़माने के शिकार का तरीका था। तीसरा तरीका छेनी की तरह सैना का जमाव था। आगे से पतला, पीछे से मोटा।

जब नाईमन सैना को लगा कि बड़ा आक्रमण होने वाला है तो तेमुजिन ने अपनी सैना को आराम करने को कहा। जब रात के समय आक्रमण हुआ तो भ्रमित नाईमन सैना इस के लिये तैयार नहीं थी और रात में उन्हों ने भागने में ही सहूलियत देखी। जो बचे उन पर तेमुजिन की सैना ने हमला किया। त्यांग खान मारा गया। उस का बेटा पश्चिम की ओर भाग गया। जेमुका जो उन के साथ था, जंगल की ओर भागा। कुछ समय वह जंगल में कुछ साथियों के साथ छोटे जानवरों का शिकार कर गुज़ारा करता रहा। पर एक दिन उस के साथियों ने ही उसे तेमुजिन के सामने पेश कर दिया। तेमुजिन ने कभी गद्दारी को स्वीकार नहीं किया। उस ने जेमुका को लाने वाले सभी व्यक्तियों उन के नेता जेमुका के सामने ही मौत के घाट उतार दिया।

किंदवती है कि तेमजिन ने अपने अन्दास जेमुका को अपने साथ रहने के लिये कहा कि वे पूर्ववत एक साथ जीवन बिता सकते हैं परन्तु जेमुका ने अपने लिये मृत्यु ही चुनी। केवल इतना कहा कि उस की मृत्यु सम्मानपूर्वक हो। उस को ऊॅंचे पर्वत पर दफनाया जाये जहॉं से वह तेमुजिन की भलाई के लिये आशीरवाद देता रहे। मंगोल जाति में सम्मानपूर्वक मौत वह होती थी जिस में खून भूमि पर न गिरे। उस की इच्छानुसार जेमुका का फैल्ट के बोरे में लपेट कर रोंधा गया।

तेमुजिन अब मंगोल जाति का निर्विवाद नेता थां। उस का क्षेत्र उत्तर में टुण्ड्रा से ले कर दक्षिण के गोबी मरुस्थल तक और पूर्व मे मनचूरिया से पश्चिम में अलताई पर्वत तक था। परन्तु औपचारिक रूप से सब की स्वीकृति लेने के लिये खुरीतलाई में निर्णय लेना आवश्यक था। ंपरन्तु जेमुतिन को कोई जल्दी नहीं थी। एक वर्ष बाद उस ने खुरीतलई बुलाई और उस के लिये बुरखान खलदोन पर्वत के पास ओनोन नदी के उद्गम स्थल को चुना। कई दिनों तक यह जष्न होता रहा। सुल्ड - बरछे पर घोड़े के बाल का गुच्छा - मंगोल योद्धा का परचम होता था और वह शान से लहराता रहा। उस ने अपनी जाति का नाम येके मंगोल उलुस - उच्च मंगोल राष्ट्र - रखा। अपने लिये उस ने चिनगिस खान नाम चुना। चिन का अर्थ मंगोल भाषा में शक्तिशाली, निर्भय, अडिग होता है। चिनो शब्द भेड़िये के लिये भी इस्तेमाल होता है।

इस समय विद्वानों द्वारा जो आशीष उस को दिया गया, वह उल्लेखनीय है। उन्हों ने कहा कि ‘‘जो भी सत्ता दी गई, वह आसमान द्वारा दी गई है तथा ईश्वर उस को आशीर्वाद देता रहे गा जब तक वह अपनी जनता की भलाई का कार्य करे गा’’।

छह साल तक शांति का काल रहा। परन्तु उस के अपने परिवार में मतभेद बनने लगे। उस के करीबी सलाहकारों में कोई रिश्तेदार नहीं था परन्तु उन के अधिकार दूसरे लोगों से कुछ अधिक थे। उस ने अपनी मॉं को करीब सौ मील दूर रहने का स्थान दिया और सब से छोटे बेटे को उस का देखने के लिये नियुक्त किया। परन्तु कलह एक दूसरे स्रोत्र से आरम्भ हुआ।

चिनगीज़ खान के बारे में एक किस्सा यह बताया जाता है कि उस के साथ एक ओझा था - तेब तनगेरी। उस की सलाह कई युद्धों में उस के साथ रही जिस में उसे सफलता मिली। वह चिनगीज़ खान का विश्वास पात्र बन गया। तेब तनगेरी ने अपनी स्थिति का लाभ दौलत इकठ्ठी करने के लिये किया। वह तथा उस के छह भाईयों ने अपनी स्थिति मज़बूत कर ली और अपने पेरोकार भी बना लिये। उस का नम्बर चिनगीज़ के बाद दूसरे स्थान पर हो गया। एक बार इन सातों भाईयों ने मिल कर तेमुजिन के भाई खस्र के साथ मारपीट कर दी। खस्र ने अपने भाई से शिकायत की पर उसे उलटा झिड़क दिया गया। इस से तेब तनगेरी का हौसला और बढ़ गया। एक बार उस ने चिनगीज़ को कहा कि उस ने स्वप्न देखा है कि खस्र उस को हटा स्वयं शासक बन गया है। इस से पहले कि खस्र कुछ करे, उसे रास्ते से हटा दिया जाना चाहिये। चिनगीज़ खान ने खस्र को उस के पद से हटा दिया तथा उसे बन्दी बना लिया गया।

जब उस की माता हो पता लगा तो वह रातों रात एक दिन की दूरी तय कर चिनगीज़़ खान के यहां पहुॅंच गई। उस ने सीधा चिनगीज़ खान के गेर में घुस कर खस्र के बॉंध खोले तथा खान को डांटना शुरू किया। उस ने उस की तुलना एक जानवर से की जो अपने बच्चे खा जाता है। चिनगीज़ खान ने उसे शांत करने के लिये खस्र को आज़ाद किया तथा उस का पद भी लौटा दिया।

कुछ समय बाद जब उस की माता की मृत्यु हुई तो तेब तनगेरी ने उस की जायदाद पर कब्ज़ा कर लिया तथा तेमुजिन के छोटे बेटे तेमयूज ओचीजैन, जो उस सम्पत्ति का हकदार था, को ज़लील किया। चिनगीज़ खान की पत्नि बोरते ने उसे समझाया कि तेब तनगेरी के कारण उस की अपनी औलाद भी खतरे में है। चिनगीज खान समझ गया और अगली बार जब सातों भाई अपने पिता के साथ आये तो उस ने तेम्यूज को तेब तनगेरी का गरेबान पकड़ने को कहा। तेन तनगेरी को बाहर ले जा कर उस की हत्या कर दी। इस प्रकार चिनगीज़ खान का अंतिम विद्रोह भी समाप्त हो गया। लोगों ने इस का अर्थ यह लगाया कि चिनगीज़ न केवल वीर है बल्कि उस की आत्मिक शक्ति सब से प्रभावशाली ओझा से भी अधिक है।

चिनगीज़ खान ने एक खानाबदोश कबीलों में बटे हुये लोगों को एक राष्ट्र में लाने का कार्य किया। इस के लिये उस ने कई पुरानी रस्मों को समाप्त किया। इस के साथ उस ने कई नई रस्मों को भी जोड़ा जो उस ने दूसरे लोगों से प्राप्त की अथवा स्वयं से सोचीं। उस ने मंगोल जाति में ऊॅंच नीच का भाव समाप्त किया। चिनगीज़ खान के नेतृत्व में कोई भी - चरवाहा, शिकारी तक - सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता था। उस ने कभी अपने किसी जनरल को अपमानित नहीं किया तथा उन्हों ने उसे सदैव आदर दिया तथा कभी गद्दारी नहीं की। उस के अपने परिवार वालों को कभी तुमन - दस हज़ार सिपाहियों का संगठन - की अध्यक्षता नहीं दी। देश में शांति बनाये रखने के लिये नये कानून बनाये गये। यह कार्य पूरे बीस वर्ष के उस के शासन काल में चलता रहा। इस बहृत कानून के होते हुये स्थानीय परम्परायें कायम रहीं जब तक वह इस बहुत कानून के विरुद्ध नहीं थीं। बौद्ध, ईसाई, मुसलमान, एवं मनियाई धर्म, कबीलाई सभी को अपने नियम अनुसार रहने व पूजा करने की अनुमति थी। उन के धार्मिक नेताओं को करों से छूट दी गई तथा किसी सार्वजनिक सेवा से भी छूट दी। करों से छूट डाक्टर, वकील, अध्यापक, विद्वत जन, शमशान कर्मी को भी दी गई। उस का स्वयं का धर्म प्राचीन मंगोल आस्था पर आधारित था जिस में पवित्र आकाश को सर्वोच्च सत्ता माना जाता था। पर्वत जो आकाश के सब से अधिक निकट थ, पूजनीय थे। नदियां भी पवित्र मानी जाती थीं।

ऑंतरिक कलह रोकने के लिये चिनगीज़ खान ने यह कानून बनाया कि सभी बच्चे वैध माने जायें गे चाहे वह अपहृत बीवी के ही हों या किसी रखैल के। उस ने शादी के लिये लड़कियों को बेचने की प्रथा समाप्त कर दी। परस्त्रीगमन को कानून के खिलाफ बताया गया परन्तु इस में मंगोल परम्परा के अनुसार परिवार के भीतर अवैध सम्बन्धों को अवैध नही बनाया गया। उस का सिद्धॉंत था कि गेर (घर) की बात गेर (घर) में ही निपटाई जाये।

जैसा कि पूर्व में अंकित किया गया है, मंगोल परम्परा से कबीलों में बटे हुये थे तथा उन के आपस में संघर्ष चलते रहते थे। इस में एक दूसरे के जानवर हथियाने अथवा चुराने पर ज़ोर था। इस परम्परगत आदत के कारण चिंगीज़ खान के कानून में जानवरों की चोरी की सज़ा मौत थी। यदि किसी को गुम हुआ जानवर अथवा अन्य सम्पत्ति मालिक को न लौटाई जाये तो वह चोरी ही माना जाता था। किसी अपराध के लिये पूरा परिवार एवं समूह ही दोषी माना जाता था।

दूसरे उस ने यह परम्परा आरम्भ की कि शासक की मृत्यु के पश्चात नया शासक कुरीतलाई में ही चुना जाये गा। सीधे विरासत से यह पदवी प्राप्त नहीं की जा सकती। यह परम्परा उस की मृत्यु के पचास साल बाद भी लागू रही तथा शासक को खुरीतलाई से ही चुना जाता था।

विद्रोह की सम्भावना को समाप्त करने के लिये हज़ार तथा दस हज़ार की सैना - तुमन- के कमाण्डर के बेटे अथवा मित्रों के बेटों का बंधक बनाया जाता था परन्तु अन्तर यह था कि वह हिरासत में नहीं थे वरन् उन्हें अपने शासन का भाग मान कर ज़िम्मेदारी के पद दिये जाते थे। केवल वह अपने पिता अथवा कमाण्डर के साथ नहीं रह सकते थे।

इन कानूनों का पालन करवाने के लिये उस ने इन्हें लिखित में भी जारी करना आरम्भ किया जो तरीका उस ने नाईमन कबीले से सीखा था। आदेश ऊपर से नीचे की ओर लिखे जाते थे किन्तु चीनी भाषा के चित्रोें के स्थान पर वर्णमाला का प्रयोग किया जाता था। चिनगीज़ खान ने डाक सेवा की भी व्यवस्था की। सैना द्वारा घोड़े तथा सवार दिये जाते थे किन्तु स्टेशन स्थानीय लोगों द्वारा ही प्रबंधित थे। यह स्टेशन लगभग बीस बीस किलोमीटर के दूरी पर थे तथा वहॉं के बीस पच्चीस घरों को इन का प्रबन्ध करना होता था। सन्देश भेजने के पुराने तरीके भी थे जैसे कि हाथ के इशारे, टार्च, तीर, धुयें द्वारा संकेत इत्यादि।

चिंनगीज़ के राष्ट्र का परिमाण बढ़ गया था पर इस के पीछे एक लम्बा संघर्ष था। अब जब कि कोई दुश्मन नहीं बचा था, समस्या यह थी कि इतनी बड़ी सैना का क्या किया जाये। उस ने अपने पुत्र जोची को सिबिर क्षेत्र में भेजा जो आज के साईबेरिया का भाग था। इस में सेना को हज़ारों नये सैनिक मिले तथा कीमती फर भी मिल गये। इस के अतिरिक्त जोची की लड़की की शादी भी उस कबीले में की गई तथा यह भूभाग भी उस के क्षेत्र का अंग बन गया।

उत्तर के इस अभियान में अधिक संघर्ष भी नहीं था और अधिक लूट भी नहीं थी। चिंगीज खान ने द​क्षिण में उईगर लोगों की ओर ध्यान दिया जहॉं धातु की बनी वस्तुयें, कपड़े तथा अन्य वस्तुओ की बहुतायात थी। वहॉं के खान ने चिगीज़ खान की मित्रता कबूल कर ली। चिंगीज ने अपनी बेटी का विवाह उस से किया तथा उसे अपना दामाद बना लिया। मंगोल राष्ट्र में अब गैर मंगोल भी शामिल हो गये। इन गेर मंगोल क्षेत्रों को खारी का नाम दिया गया। खारी शब्द का एक अर्थ ससुराल वाले भी होता है। इस का एक अर्थ अश्वेत भी होता है। यह उल्लेखनीय है कि इन अश्वेत लोगों का विवाह आपस में होता था पर मंगोल जाति के लोगों से नहीं।

उईगर खान जब चिंगीज़ खान से आया तो उस के साथ कई ऊॅंटों पर लदे सोने चॉंदी, जवाहरात की वस्तुयें थी। इस से जो जिज्ञासा और चाहत जन्मी, उस ने चिंगीज़ खान को इस ओर आकर्षित किया। मंगोल जाति के आपसी संघर्ष से आगे बढ़ कर अब विजय का दूसरा अभियान आरम्भ हुआ जिस से चिंगीज़ खान की गिनती विश्व विजेता के रूप में हुई। परन्तु यह फिर कभी।

(adopted from genghis khan -- jack weatherfort -- random house --  2003)


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