एक रुबाईkewal sethiJul 23, 20201 min readएक रुबाईमैं हो जाऊं बलिहार किसी परऐसा कोई हमारा नहीं दिखताजिस को देख कर मैं पूरी रात काट दूंऐसा कोई सितारा नहीं दिखता(होशंगाबाद - 1964)
शीर्षक बाद मेंशीर्षक बाद में - हसरत है बस यही कि वह इक बार तो देख ले -- ज़रा ठीक से बताओ, तुम्हारी पेंण्टिंग को कि तुम्हें - मुझ नाचीज़ में वह बात कहॉं जो है इस चित्र में -- दिल को सम्भालो गे तो आये गी जान चित्र
बताईयेबताईये एक बात मुझे आप को है आज बतानी मेरे लिये अहम है आप के लिये बेमानी कालेज में एक लड़की, भला सा है नाम देखती रहती हे मेरी तरफ बिना...
व्यापम की बात व्यापम की बात - मुकाबला व्यापम में एम बी ए के लिये इण्टरव्यू थी और साथ में उस के थी ग्रुप डिस्कशन भी सभी तरह के एक्सपर्ट इस लिये थे...
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