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गायक

  • Dec 26, 2025
  • 2 min read

गायक


वह उस घर में एक गरीब रिश्तेदार की तरह रहता था। क्यों? इस की भी एक कहानी है पर वह फिर कभी। अभी तो अब की बात करें। घर के किसी सदस्य को उस से हमदर्दी नहीं थी। उस से हर बेगार का काम लिया जाता था और बदले में मिलता था सिर्फ तिरस्कार। पर नहीं, एक था जिसे हमदर्दी थी। और वह उस के उस गुण के कारण कि वह एक अच्छा गायक था। कुदरत जब कुछ ले लेती है तो बदले में कुछ देती भी है और उसे अच्छा गला दिया था। सिरोजनी को उस की आवाज़ पसंद थी और वह भी। उस की आवाज़ को पसंद करने वाली कोमल भी थी जो पास में ही रहती थी और सिरोजनी की सहेली थी।

जैसा कि कहानी में अक्सर होता है, सिरोजनी की पसंद धीरे धीरे प्रेम मे बदल गई। और हमारे गायक यानि कि नायक को भी उसी लय में भेज दिया। बात कब तक छुपी रहती। एक दिन पता चली और हमारे नायक, यानि कि गायक, को घर से निकाल दिया गया। कोमल ने उसे संतावना दी और अधिक महत्वपूर्ण यह कि कुछ पैसे भी। और वह सफर पर निकल पड़ा। रात की पसैन्जर गाडी में बैठ गया, टिकट लेने का सवाल ही नहीं था। सुबह पौ फटने से पहले किसी शहर में उतर गया। दिन भर घूमा। शाम को फिर गाड़ी में। यह दिनचर्या हो गई। रात गाड़ी में, दिन आवारागर्दी में।

इसी आवारागर्दी में एक दिन एक पार्क में चला गया। पार्क में आठ दस व्यक्ति बैठे थे, गोल चक्कर में और एक वृंद बज रहा था। एक व्यक्ति एक फिलमी गाना गा रहा था। हमारे नायक, यानि कि गायक, को पसंद आया। जब गाने वाला रुका तो बेसाख्ता उस ने भी वही गाना शुरू कर दिया। लोगों का ध्यान उस ओर गया। आवाज़ ठीक थी, इस कारण किसी ने रोका नहीं। दो रोज़ बाद फिर उसी जगह पर गया। इस बार उस का स्वागत किया गया और उस ने कुछ सुना, कुछ सुनाया।

अगली बार किसी ने ठिकाना भी पूछ लिया और फिर हालत देखते हुये सब ने चंदा किया और उस के रहने के लिये सराय में भी व्यवस्था कर दी। किसी भी काम से, किसी भी स्तर के काम करने से परहेज़ नहीं था इस कारण रोटी का इंतज़ाम भी हो गया। वह उस समूह का सदस्य मान लिया गया।

जब थोड़ा और बढ़ा तो अन्य स्थान से भी गाने के लिये बुलाया जाने लगा। एक बार एक सज्जन ने उसे अपने होटल में बुला कर वृन्द के साथ गाना रिकार्ड भी कर लिया। अब उसे कुछ नाम देना था सो नाम दिया गया प्रभात। वह रिकार्ड चल निकला तो वह व्यक्ति उसे वहीं ले गया जो इन का अंतिम पड़ाव होता है यानि कि मुम्बई।

एक दिन कोमल को एक पत्र मिला। उस में केवल इतना लिखा था - ‘‘याद’’ और नीचे एक पता। कोमल को समझते देर नहीं लगी और सिरोजिनी तक यह सन्देश पहुॅंच गया। कुछ दिन बाद प्रभात को एक पत्र मिला जिस में केवल तिथि और गाड़ी नम्बर लिखा था।

हमारे गायक, यानि कि नायक, के लिये इतना तो उम्मीद से अधिक था।

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