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चंगेज़ खान - 7

kewal sethi
Apr 10
5 min read

चंगेज़ खान - 7


चार साल के अभियान को आरम्भ करते समय चिनगीज़ खान को पता था कि उस का जीवन समाप्त होने वाला है। अतः उसे अपने उत्तराधिकारी को नियुक्त करना था। इतने बड़े साम्राज्य में हर एक के लिये काफी भूमि तथा जानवर उपलब्ध थे किन्तु चारों में एक को ही सर्वोच्च खान होना था। शेष को उस के साथ काम करना था। इस के लिये सब के साथ बातचीत कर सारे इंतज़ाम किये जाने थे।

जैसा कि उस का स्वभाव था, वह यह कार्य सभी की रज़ामन्दी से ही करना चाहता था। अभियान पर रवाना होने से पूर्व उस ने खुरीतलाई बुलाई जिस में इस बात का खुलासा किया जाना था। भाईयो, बेटों के अतिरिक्त इस खुरीतलाई में कई सैनिक जनरल भी थे क्योंकि उन्हीे के दम पर साम्राज्य कायम रहना था। दोनों बड़े बेटे जोची तथा चाघाताई वहॉं थे। तीसरा आगोदई था तो परन्तु अपने शराब के खुमार में था और छोटा भाई तोलुई चुपचाप ही रहता था।

विषय के बारे में बताने के बाद चिनगीज़ ने जोची को अपनी बात कहने क लिय आमंत्रित किया पर इस से पहले कि वह कुछ कहे, चाघातई ने कहा कि क्या इस का मतलब है कि जोची को उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाना है जब कि उस के पिता का भी मालूम नहीं है। जोची इस पर बिफर पड़ा तथा चाघातई को कालर से पकड़ लिया। दोनों गुत्थम गुत्था हो गये पर उन्ह्रें शांत किया गया। चिनगीज़ खान ने कहा कि यह उस ज़माने की बात थी जब ऐसी अपहरण और ज़बरदस्ती की बातें होती थी जिन में बोर्ते का कोई कसूर नहीं था। वह दोनों - जोची और चाधाताई — की मॉं थी।

उस ने स्पष्ट किया कि वह जोची को अपना बड़ा बेटा मानता है तथा उस के बारे में सभी को वैसा मानना हो गा। चाघाताई ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया। यह उल्लेखनीय है कि बोर्ते इस बैठक में नहीं थी। वह उस समय अवर्गा में थी।

इस समय चाघातई को यह पता था कि उस के सर्वोच्च खान बनने का सम्भावना नहीं है। इस कारण उस ने सुझाव दिया कि तीसरे बेटे ओगोदई को यह रुतबा दिया जाये। बेकार में वाद विवाद से बचने के लिये और कोई रास्ता न देख कर चिनगीज़ खान ने यह सुझाव मान लिया। उस ने चारों बेटों के लिये स्टेप्स का तथा जीते गये इलाकों का बटवारा भी कर दिया।

इस अभियान के लिये उस ने अपने छोटे भाई ओटचीजन को अवर्गा में छोड़ा और चारों बेटों को साथ लाया था, यह सोच कर कि एक ओर तो उन्हें युद्ध का तजरबा हो जाये गा र्और दूसरे वह आपस में एक दूसरे को समझ सकें गे। ख्वारिज़्म के अभियान के समय चिनगीज़ खान ने दोनो बेटों के बीच सुलह करवाने का प्रयास किया किन्तु उसे सफलता नहीं मिली।

ख्वाजि़्म के अभियान की समाप्ति पर चिनगीज़ खान के द्वारा बडे पैसाने पर शिकार का आयोजन किया गया जो कई महीनों तक चला। इस का एक मकसद सेना को आराम देने का भी था और दूसरा मकसद भाईयों को एक साथ मिलाने तथा उन्हें एक दूसरे को समझने का मौका देना भी था परन्तु इस में भी जोची ओर चाघाताई में समझौता करना सम्भव नहीं हो सका। अधिकतर समय जोची अलग क्षेत्र में ही रहा और उस ने अपना अलग शिकार का प्रबन्ध किया। चिनगीज़ खान में बारी बारी समण्ज्ञने तथा नाराज़ होने का भी प्रदर्धन किया पर इस में भी उद्देश्य प्राप्ति नहीं हो पाई। अतः यह बात भविष्य पर ही छोड़ दी गई।

यहॉं पर चिनगीज़ खान की बच्चों को दी गई नसीयत का बताना जाना उचित हो गा हालांकि इस का लाभ नहीं हुआ।

‘‘ 1. नेतृत्व की पहली कुंजी आत्म-नियंत्रण है, विशेष रूप से घमंड पर काबू पाना। यह एक जंगली शेर पर काबू पाने से भी कठिन है; दूसरी बात क्रोध, जिसे सब से महान पहलवान को हराने से भी हराना कठिन है, पर काबू पाना है। अगर आप अपने घमंड को निगल नहीं सकते, तो आप नेतृत्व नहीं कर सकते। कभी भी खुद को सब से ताकतवर या सब से बुद्धिमान न समझें। सब से ऊँचा पहाड़ भी जानवरों से भरा होता है। वे उस पर कदम रखते हैं। जब जानवर पहाड़ की चोटी तक चढ़ते हैं, तो वे उस से भी ऊँचे होते हैं। यदि आप क्रोध के वश में हैं तो कोई अच्छा निर्णय भी लेना कठिन है।

2. ज्यादा बात मत करें। केवल वही कहें जो कहना आवश्यक है। एक नेता को अपने विचारों और राय को शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कर्मों के माध्यम से प्रदर्शित करना चाहिए।

3. शासक कभी भी खुश नहीं हो सकता जब तक उस के लोग खुश नहीं हैं।

4. दृष्टि, लक्ष्य और योजना का महत्व अत्याधिक महत्वपूर्ण है। लक्ष्य की दृष्टि के बिना, कोई व्यक्ति अपनी खुद की जिंदगी का प्रबंधन नहीं कर सकता, दूसरों की जिंदगी की तो कहीं अधिक कठिन बात है।

5. किसी को भी बुजुर्गों की शिक्षाओं से बहुत दूर नहीं भटकना चाहिए। पुरानी डील (कुर्ता नुमा कोट) बेहतर है और हमेशा अधिक आरामदायक होता है। यह जीवन की कठिनाइयों में भी जीवित रहता है। झाड़ी में भी सलामत रहता है जबकि नया और अनपरीक्षित डील जल्दी ही फाड़ दिया जाता है।

6. कभी भी भौतिक चीजों और व्यर्थ सुखों के साथ रंगीन जीवन के पीछे न चलें, इस से यह भय होगा कि आप अपनी दृष्टि और उद्देश्य को भूल जाएं। एक बार जब आपके पास शानदार कपड़े, तेज घोड़े, सुंदर महिलायें हों, उस स्थिति में आप किसी गुलाम से बेहतर नहीं हों गे और आप निश्चित रूप से सब कुछ खो दें गे।

7. किसी सैना को जीतना किसी राष्ट्र को जीतने के समान नहीं है। आप श्रेष्ठ रणनीति और हुश्यार लोगों के साथ किसी सैना को जीत सकते हैं, लेकिन आप केवल लोगों के दिलों को जीत कर किसी राष्ट्र को जीत सकते हैं।

8. एक सा व्यवहार विभिन्न लोगों के लिये सम्भव अथवा उचित नहीं है। उन का आचार व्यवहार अलग होता है। विभिन्न इलाकों के लोगों को कभी भी एकजुट नहीं होने दिए जाने चाहिए। झील के विभिन्न किनारों पर जीते गए लोगों पर झील के विभिन्न किनारों पर ही शासन किया जाना चाहिए।

इस बारे में सदेह है कि चिनगीज़ खान अपने बारे में क्या सोचता था। वैसे उस ने कभी तड़क भड़क वाला जीवन नहीं अपनाया। वह वही खाता था जो उस के जानवर चराने वाले खाते थे। उस ने अपने बारे में एक चीनी ताओवादी को अपने बारे में बात की जिस से उस के चरित्र का कुछ पता चलता है। यह लेख चीनी भाषा में उपलब्ध है। उस ने कहा कि उस के विरोधियों की हार उन की अपनी मूर्खता के कारण था न कि उस की अपनी काबलियत के कारण। उस का कहना था कि उस में कुछ विशेष प्रतिभा नहीं है परन्तु सर्वव्यापी नील गगन ने शत्रुओं के विलास पूर्ण जीवन का उन्हें दण्ड दिया है। वह अपने साथियों को अपने भाइयों जैसा ही समझता है। उस का कथन था कि उस को उत्प्रेरण हून साम्राज्य से ही मिली है। उन्हीं के अनुरूप वह अपना राज्य चलाना चाहता है। उस ने यह स्वीकार किया कि वह प्रशासन में उतना सफल नहीं रहा जितना कि युद्धों में। इस का कारण हे कि उसे दक्ष सैनापति तो मिले पर दक्ष प्रशासक नहीं।

यहां पर चिनगीज़ खान की कोर्ट के एक वाक्ये का ज़िकर उचित प्रतीत होता है। बात यह थी कि चनगीज़ ने कहा कि उस का नाम रहे गा। कोर्ट में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि उस ने इतने लोग मारे हैं कि नाम लेने वाला कोई बचा ही नहीं। पर खान का कहना था कि जब राजाओं की बात हो गी तो उस का नाम आये गा ही।

(extracted from - genghis khan and the making of modern world – jack weatherford -- three river press -- 2004 )

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