मंगोल तथा लिपि में सुधार
- kewal sethi
- 4 days ago
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मंगोल तथा लिपि में सुधार
मंगोल साम्राज्य प्रशान्त सागर से ले कर भूमध्य सागर तक फैला हुआ था। चंगीज़ खान के पौत्र खुभीलई के समय यह अपनी चर्म सीमा पर था। इस का विस्तार पूरे चीन में तथा तिब्बत में हो गया था और वियतनाम का कुछ भाग भी शामिल था। स्पष्टतः ही इस में कई धर्मों के लोग थे और उन की कई भाषायें थीं। खुभिलई का साम्राज्य वर्तमान चीन के क्षेत्र से पॉंच गुना बड़ा था।
मंगोल साम्राज्य में चनगीज़ खान के समय से ही अभिलेख रखने का प्रचलन था, यद्यपि मंगोल मुख्यतः निरक्षर थे। यह प्रथा तब आरम्भ हुई जब चनगीज़ खान ने पूर्व व्यवस्था को बदलते हये निर्णय लिया कि लूट का माल एक स्थान पर रखा जाये गा तथा फिर खान उसे सब में वितरित करे गा। इस के लिये रिकार्ड बनाना आवश्यक था। ज़िकर आता हे कि पश्चिम एशिया में अपने अभियान के दौरान चनगीज़ खान ने अगस्त 1221 में कोरिया से एक लाख कागज़ शीट मंगाये ताकि अभिलेख तैयार किये जायें। यह परम्परा आगे भी जारी रही। अलग अलग लिपि में इसे तैयार करना कठिन था और चीन की चित्रमय लिपि तो इतने विविध क्षेत्र के नाम लिखने के भी योग्य नहीं थी। इस कारण खुभीलई ने तिब्बत के एक लामा फागस्पा को नई लिपि बनाने के लिये कहा। इस में केवल 41 अक्षर थे जो अधिकतर तिब्बती लिपि के अनुरूप थे। इसे षासकीय लिपि करार दिया गया तथा सभी षासकीय अभिलेख इस में तैयार किये जाते थे।
परन्तु अन्य क्षेत्रों की तरह मंगोल इस बारे में भी उदारता से कार्य करते रहे। स्थानीय लिपियों को समाप्त नहीं किया गया। वह अपने अपने क्षेत्र में प्रयोग में लाई जाती रही। चीन में मंगोल सत्ता के कमज़ार पड़ने पर चीन ने पुरानी चित्रमय लिपि फिर से आरम्भ कर दी। अन्य क्षेत्रों में भी ऐसा ही हुआ।
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