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चंगेज खान - प्रारम्भिक जीवन

kewal sethi
Jul 4, 2025
8 min read

 चंगेज खान

प्रारम्भिक जीवन


चंगेज़  खान के बारे में लिखने के पूर्व उस क्षेत्र के बारे में लिखना उचित हो गा जिस में वह पला बढ़ा। वर्तमान मंगोलिया के बिल्कुल उत्तर में खैंमटी पर्वत र्श्रंखला है जो साईबेरिया से लगी हुई हैं। ंइसी में क्रॅंचे नीचे कई पहाड़ हैं। पुराने काल में यहॉं के निवासी शिकार पर ही निर्भर रहते थे। खैमंटी पर्वत के नीचे स्टेप्स के मैंदान थे, गैर हमवार स्थान पर। इन का मुख्य धन्धा जानवरों की चराई थी जिस के लिये उन्हें इधर उधर भटकना पड़ता था। गर्मियों में तो खूब घास होती थी किनतु सर्दियों में बरफ ही बरफ थी। लोग कबीलो में बटे हुए थे। आपस में मारकाट चलती ही रहती थी, कभी घास के मैदान पर, कभी जानवरों पर,कभी औरतों पर। बदला लेने की भावना को दशकों तक याद रखा जाता था। कबीलों में आपस में शादी तो होती थी पर उस की रस्म अलग थी। अगर लडका पसन्द आ जाये तो उसे लड़की के कबीले में रह कर सेवा करना पड़ती थी। यदि लड़की भी पसन्द करने लगे तो शादी हो सकती थी और लड़का लड़की को ले कर अपने कबीले के लिये रवाना होता था। शादी का दूसरा तरीका लड़की को अगवा करने का था। 

जहॉं तक धर्म का प्रश्न था, मंगोल व्यपक नील गगन को ही सर्वोच्च सत्ता मानते थें। उस क्षेत्र में विद्यमान पर्वत की चाटियॉं ही पूज्य थीं। नदियॉं भी पवित्र मानी जाती थीं। 

चंगेज़ की मॉं होलुन शादी के बाद अपने पति के साथ मेरकिड कबीले में जा रही थी जब येसुगई नाम के व्यकित ने उस का अपहरण कर लिया। यसुगई एक कबीले बोरिनि का सदस्य था जो संख्या में बहुत कम था और ताईचिंद कबीले के मातहत था। येसुगई की पूर्व में एक पत्नि थी और उन का एक लड़का बंगअर भी था। होलुन को अपनी सौत के साथ ही रहना था पर उन के गेर (तम्बू समान घर) अलग थे। समय पा कर होलुन का पु़त्र हुआ जिसे तेमुजिन नाम दिया गया। तेमुनजिन नाम इस कारण दिया गया कि उस समय उस के पिता ने एक दूसरे कबीले के साथ युद्ध में इस नाम के एक व्यकित को मृत्यु के घाट उतारा था। मंगोल कबीलों में आपस में संघर्ष तो बहुत होता था परन्तु उस का आश्य केवल लूट होता था। यदि दुश्मन कम़ज़ोर होता था तो वह भाग खड़ा होता था परन्तु उस का पीछा नहीं किया जाता था। जो जानवर अथवा दूसरा माल मिला वही ले कर आ जाते थे। इन लोगों में किसी व्यक्ति को मारने का श्रेय नहीं था। वास्तविक श्रेय इस में केवल यह देखा जाता था कि लड़ाई के कारण कितनी लूट हो सकी। होलुन ने तेेमुनजिन के चार छोटे भाईयों और एक बहन को भी जन्म दिया था। 

पिता पुत्र में कोई विशेष लगाव नहीं था बल्कि एक बार तो वह परिवार से बिछुड़ भी गया। उस की तलाश के लिये मेहनत नहीं की गई। ताईचिंद कबीले के तरगूताई ने उसे पाया और वह कुछ समय वह उस के साथ रहा। पर फिर अपने परिवार में वापस आ गया।  

नौ साल की आयु में येसुगई तथा तैमुजिन होलुन के कबीले की ओर गये ताकि उस के लिये बीवी डूूंढी जाये। गरीबी के कारण तोहफे देने के लिये तो कुछ था नहीं पर तैमुजिन वहॉं पर परिवार की सेवा में रहे गा तो वह अपने सौतेले भाई के साथ तकरार से बचा रहे गा, शायद यह विचार भी था। रास्ते में वह एक स्थान पर रुका। वहॉं बोरते नाम की लड़की जो तैमुजिन से दो साल बड़ी थीं, वह पसन्द आ गई और उसी के घर पर तैमुजिन को छोड़ कर जब येसुगई  वापस आ रहा था तो रास्ते में खाने के लिये एक परिवार के पास रुक गया। वहॉं तारतार समूह के एक व्यकित ने उस को ज़हर दे दिया। वापस आ कर उस ने तुरन्त एक व्यक्ति को तैमुजिन को वापस लाने के लिये भेजा पर उस के आने से पहले ही येसुगई की मृत्यु हो गई। 

वैसे विधवा विवाह कोई बड़ी बात नहीं थी और होलुन अभी तीस वर्ष से कम की ही थी। ताईचिंद कबीले ने दो विधवाओं और उन के सात बच्चों का भार उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई और परिवार को भगवान भरोसे छोड़ दिाय। वे उन के जानवर भी साथ ले गये।  

होलुन ने हार नहीं मानी ओर अपने परिवार के पालन के लिये आस पास की झाड़ियों से खाने का सामान निकाला। चूहों और दूसरे छोटे जानवरों को मार कर उन से काम चलाया। बच्चे जब कुछ बढ़े हुये तो वह भी इस काम मे हाथ बटाने लगे। इसी ज़माने में तैमुजिन की मुलाकात जेमुका नाम के एक लड़के से हुई जो दूसरे कबीले का था पर दूर का रिश्तेदार था। उस ने उस के साथ भाई चारे का रिश्ता कायम किया जिस में एक दूसरे के खून को पी की दोस्ती निभाने की बात की जाती थी। । इस रिश्ते को अन्दास कहा जाता था। 

जेमुका तैमुजिन का एक मात्र अन्दास था। उस के पिता येसुगई पास के एक कबीले के सरदार ओंगखान के अन्दास थें। 

चूॅंकि घोड़े की सवारी ही बचने का, हमला करने का, शिकार करने का एक मात्र तरीका था, इस कारण चार साल की उम्र से ही बच्चों को घोड़े की सवारी सिखाई जाती थी। जब उन के पैर रकाब तक पहुॅंच जाते थे तो तीरअन्दाजा़ी सिखाई जाती थी। यह इलाका साईबेरिया और मंगोलिया की सहरद पर था औा सर्दियों में नदियॉं भी जम जाती थीं। मंगोल कबीले घुड़सवारी में बहुत दक्ष थे। वे जानते थे कि घोड़े कितनी बरफ में चल सकता है, या तैर सकता हैं और कितना भार उठा सकता है। यह हुनर आगे चल कर काफी उपयोगी सिद्ध हुआ। बैल के सींग में छेद कर एक तरह की सीटी बनाई जाती थी जे आपस में एक दूसरे को गुप्त सन्देश भेजने के काम भी आती थी। 

कबीले की रस्म के अनुसार येसुगई की मृत्यु के बाद अब बड़ा बेटा बेरगर परिवार का मुखिया था और अन्य सदस्यों को हुकुम दे सकता था। एक बार जब तेमुजिन ने बेरगर की शिकायत अपनी मॉं से की तो उस ने उसे डॉंट दिया। रस्म के अनुसार बेरगर परिवार का मुखिया था और उसे यह भी हक था कि वह बाप की विधवा को, जो उस की मॉं नहीं थी, का अपनी पत्नि बना ले। तैमुजिन को यह स्वीकार नही था तथा उस ने अपने छोटे भाई खस्र के साथ मिल कर बेरगर की हत्या कर दी। 

बेरगर की हत्या से पहले भी तैमुजिन का परिवार बहिष्कृत था पर अब वह अपराधी भी था क्योंकि परिवार के मुखिया की हत्या कर उस ने कबीले की रस्म को तोड़ा था। तेमुजिन अब परिवार का मुख्यिा था और अपने परिवार के ले कर वह भाग निकला। ताईचिंइ कबीले के लोगों ने उन का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। उसे कैद में रखा गया। उस के गले में बैल के गले में डालने वाला जुआ डाला गया। ंइस कारण वह बिना मदद के खा भी नहीं सकता था। उसे प्रति रात अलग अलग परिवार के साथ रखा जाता था। इन परिवारों में वे भी थे जो बंधुआ थे। इन में ही एक परिवार को उस पर दया आई और उसे वहॉं से भागने में भी मदद की यद्यपि उस में उन का अपनी जान का भी खतरा था। इस अनुभव के दो परिणाम हुये, एक् क्बीले के मुख्य व्यक्तियों के विरुद्ध क्षोभ तथा बाहरी लोागों के अपनापन का अहसास। तेमुजिन कितनी देर तक कैद में रहा, इस के बारे में जानकारी नहीं है।  

जब तेमुजिन सोलह वर्ष का हुआ तो उसे मंगेतर बोरते का याद आई जिसे उस ने पित की मृत्यु के बाद नहीं देखा था। वह अपने भाई बेलगुतई के साथ उस की तलाश में निकला। बोरते अभी भी गैर शादी शुदा थी यद्यपि शादी की उम्र लगभग समाप्त हो रही थी। बोरतेे तथा उस के पिता अभी भी रज़ामंद थे। शादी के बाद उन्हें रवाना किया गया। पिता ने एक बढ़िया फर का कोट भेंट में दिया। कायदे के अनुसार तेमुजिन को यह कोट अपने पिता को देना था। उस के न होने के कारण तेमुजिन ने इसे पिता के अन्दास ओंगखान को दियां। ओंगखान केरिड कबीले का नेता था। वास्तव में केरिड कबीला एक संध का मुखिया था जिस में कई कबीले आते थे। मंगोल क्षे़त्र में इस प्रकार के तीन संघ थे। केरिड के पश्चिम में नाईमन संध था और पूर्व में तातार थे जो चीनी कबीले जुड़चंद कबीले के ताबेदार थे। ओंगखान ने तेमुजिन की भेंट स्वीकार कर ली तथा इस प्रकार उसे अपना भतीजा मान लिया। उस से सुरक्षा का वचन ले की तेमुजिन तथा उन के भाई लौट आये। 

इसी काल में दो और लड़के परिवार में शामिल हो गये। यह थे बूरचू और जेलमे। सात जवानों के साथ यह परिवार शिकार करने तथा जीवनयापण के लिये तैयार था। इन के साथ तेमुजिन की मॉं, सौतेली मॉं, बहन और एक औरत जिस के बारे में ज्ञात नही है, थीं। ओंगखान के कारण तेईचन्द कबीले के किसी आक्रमण का भय भी नहीं था। परन्तु कुदरत को यह स्वीकार नहीं हुआ और तेमुजिन के जीवन में एक मोड़ आया जिस ने इतिहास बदल दिया। 

तेमुजिन की मॉं का विवाह मेरकिड कबीले में हुआ था जब उस का अपहरण तेमुजिन के पिता द्वारा कर लिया गया। अठारह साल बाद मेरकिड कबीले ने इस अपमान का बदला लेने की सोची। उन का दल हमला करने के लिये आया पर तेमुजिन और दूसरे पुरुष भाग निकले। तेमुजिन की मॉं और बहन उन के साथ थी पर तीन औरतें वहीं रह गईं। मेरकिड का हमलावर दल ने उन में से बोरते का अपहरण कर लिया। मेरकिड का दल तेमुजिन और साथियों की तलाश करता रहा और यह बचते रहे। आखिर मेरकिड दल वापस लौट गया। 

इस प्रकार का अपहरण अनोखी घटना नहीं थी। तेमुजिन को और पत्नि मिल जाती यद्यपि थोड़ी कठिनाई होती क्योंकि वह पहली बीवी की रक्षा नहीं कर पाया पर इस से पार पाया जा सकता था। वह अपने छोटे से समूह में रह सकता था और जीवन वैसे ही चलता रहता। तेमुजिन ने इस बारे में सवोंच्च सत्ता से मार्ग दर्शन चाहा। अपने कबीले के रिवाज के अनुसार व्यापक नील गगन तथा उस क्षेत्र की सब से बड़ी चोटी जो आकाश के सब से अधिक निकट थी - बुरखान खलदून - से प्रार्थना की। हुकुम हुआ कि उसे अपनी बीवी का वापस लेना हो गा। और कोई भी रास्ता उसे नही दिखा चूॅंकि वह छोटा सा समूह किस किस से टक्कर ले सके गा। उसे और पत्नि भी मिल जाये पर दूसरे कबीलों से हमेशा खतरा बना रहे गा। इस सब के पीछे उस का बोरते से प्रेम भी अपना ध्यान आकर्षित कर रहा था। 

आखिर तैमुजिन ने लड़ने की सोची। इय के लिये उसे ओंगखान की याद आई जिस ने उसे अपने आधीन स्थान देने की पेशकश की थी। ओंगखान ने मेरकिड के खिलाफ उस की सहायता करना स्वीकार किया। उस ने जेमुका, जो तेमुजिन का अन्दास था, को भी मदद के लिये बुला लिया। इस दल ने मेरकिड पर आक्रमण किया। जैसे ही हमलावर दल पहुॅंचा, मेरकिड के जवान भाग निकले। हमलावर दल अपने व्यवहार के अनुसार लूट का माल बटोरने लगे पर तेमुजिन पूरे कैम्प मं बोरते बोरते चिल्लाता घूम गया। वह उस व्यक्ति के साथ गाड़ी में थी जिसे वह सौंप दी गई थी। बोरते ने सब चीखो पुकार में तेमुजिन की आवाज़ सुनी तो गाडी से उतर कर उस आवाज़ की ओर भागी और इस प्रकार दोनों का मिलन हुआ। 

परन्तु ऐक मुश्किल आ पउ़ी। बोरते उस समय गर्भचती थी। उस के पिता कौन थे, यह तय नहीं हो पाया और इस बात ने लम्बे समय तक मंगोल राजनीति को प्रभावित किया। परन्तु इस से तेमुजिन और बोरते के सम्बन्धों में कोई दरार नहीं आई। इस पुत्र का नाम जोची रखा गया। जोची का अर्थ है मेहमान। उस समय वह जेमुका के मेहमान थे, शायद इस कारण। बाद में उन के और बच्चे भी हुये। 


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