top of page
  • kewal sethi

एशिया प्लैटो

एशिया प्लैटो

नाम तो सुना था बहुत पर देख न पाये थे

चर्चा होती थी बहुत, पर समझ न पाये थे

एक नया तरीका था, इक नई बात थी वहाॅं

जो भी जाता था, गुण गाता हुआ आता था सदा

कभी तो इन्नर गर्वनैस को बारे में जाता था बतलाया

कभी बैलंस शीट जीवन की को जाता था सराहया

अपने अपने अनुभव बाॅंटने आते थे लोग अनेक

पारंगत थे जो अपने क्षेत्र में एक से बढ़ कर एक

बीच बीच में कई प्रकार की फिल्में दिखलाई जाती हैं

इस तरह हसते हसते हर बात समझाई जाती है।

खेल खेल में सिद्धाॅंत प्रबन्धन के बतलाना

कभी सब का मिल कर किसी थीम पर गाना

समझाने को श्रम का महत्व की ऐसे तैयारी

कभी लंगर की सेवा कभी बर्तन धोने की बारी

समय पर पहुॅंचने की तरकीब यह थी बनाई

लेट आने वालों के स्वागत हेतु ताली पिटवाई

सब सुन सुन कर अपना भी करता था मन

देखें स्वयं जा कर कैसा है यहाॅं का जीवन

सो आये और फिर बिताये पूरे पाॅंच दिन यहाॅं

जैसा सुना था वैसा ही पाया सब कुछ यहाॅं

यादें यहाॅं की जीवन संवारने के आयें गी काम

प्रयास हो गा पहुॅंचाये सब ओर यहाॅं का पैगाम

कहें कक्कू कवि एक ही सन्देश श्हॉं का महान

अपने जीवन को लगाओ करने सब का उत्थान

पंचगनी 2 मार्च 2017


1 view

Recent Posts

See All

महापर्व

महापर्व दोस्त बाले आज का दिन सुहाना है बड़ा स्कून है आज न अखबार में गाली न नफरत का मज़मून है। लाउड स्पीकर की ककर्ष ध्वनि भी आज मौन है। खामोश है सारा जहान, न अफरा तफरी न जनून है कल तक जो थे आगे आगे जलूसो

पश्चाताप

पश्चाताप चाह नहीं घूस लेने की पर कोई दे जाये तो क्या करूॅं बताओं घर आई लक्ष्मी का निरादर भी किस तरह करूॅं नहीं है मन में मेरे खोट क्यूॅंकर तुम्हें मैं समझाऊॅं पर कुछ हाथ आ जाये तो फिर कैसे बदला चकाऊॅं

प्रजातन्त्र की यात्रा

प्रजातन्त्र की यात्रा यात्रा ही है नाम जीवन का हर जन के साथ है चलना विराम कहॉं है जीवन में हर क्षण नई स्थिति में बदलना प्रजातन्त्र भी नहीं रहा अछूता परिवर्तन के चक्कर मे आईये देखें इस के रूप अनेकों सम

Comments


bottom of page