• kewal sethi

गंगू

गंगू


हम ने कभी सोचा भी ना था कि गंगू हम एक दिन आश्चर्यचकित कर देगा। वह एक सामान्य सा व्यक्ति था जो चुपचाप अपना जीवन गुजार रहा था। किसी ने भी कभी उसे कोई गलत कार्य करते हुये नहीं देखा था। वह अपने भाग्य से संतुष्ट था। कभी भी उस ने किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया ना ही खुद कभी शिकायत की। सिवाये इस के कि हम दोनों एक ही गांव में रहते थे, और इस नाते कभी कभी मुलाकात और बात हो जाती थी, हमारा आपस में कोई संबंध नहीं था जिस से उस को याद किया जा सके। गांव में रहने वाले सैकड़ों व्यक्तियों की तरह वह भी उसी तरह का व्यक्ति ही था. बस एक बात थी कि वह दूसरे लड़कों से अलग वह शाॅंत और गम्भीर प्रकृति का था। उस के माता पिता उस की अल्प आयु में ही स्वर्गधाम चले गये थे और उस का लालन पालन उस के चाचा ने किया था। पढ़ाया लिखाया था और उस के व्यस्क हो जाने पर उस के पिता की जमीन उसे दे कर अपने कर्तव्य को पूरा कर दिया था। इस से अधिक वह उसे कुछ नहीं दे सके थे। एक बार फिर मैं कहना चाहूंगा कोई अनहोनी बात होने की अपेक्षा नहीं थी।


हम कुछ साथी हमारे कमरे में बैठकर बातचीत कर रहे थे कि गंगू उधर आया। चाय पान तो पूछना ही था, उस के बाद हाल पूछा तो उस ने कहा ‘मैं पुतली से शादी कर रहा हूं’। एक मिनट तो हम इस पर विश्वास ही नहीं कर पाये कि हम ने जो सुना, वह सही था। दौबारा उस से पूछा तो वह फिर वही बोला ‘मैं पुतली से शादी कर रहा हूॅं’. यूॅं शादी करना कोई ऐसी बड़ी बात नहीं है. हजरत आदम और हव्वा के जमाने से आदमी और औरतें शादी करते रहे हैं. इस शादी में ऐसी क्या बात थी कि जिस से हम थोड़ी उलझन में पड़ गये।


पुतली सुंदर थी। गांव के स्तर से देखा जाये तो वह तो बहुत ही सुंदर थी. इस के अतिरिक्त वह चुलबुली थी। वह शहर में रह कर आई थी और जब गांव में आई तो शहर की हवा भी साथ में ले आई जिस में रोमांस भी घुला हुआ था। कुछ ही लड़के थे जो उस को देख कर आहें न भरते हो. और वह भी अपने शहर के किस्से सुनाती रहती थी। लड़कियॉं तो उस के किस्से सुन सुन कर तंग आ चुकी थीं। पर जहां तक लडकों का सवाल था, वह तो हंस कर बात हो जाने पर दो दिन तक खाना नहीं खाते थे। जब वह किसी से अधिक बात कर लेती थी तो वह पूरे गांव के लिये एक नया समाचार होता था। पर गंगू की इस प्रकार की बात करने की कोई ख्वाहिश नहीं थी। उस ने कभी पुतली के साथ शादी की बातचीत करने की कोशिश की हो, हम सोच भी नहीं सकते थे। इसी लिये जब उस ने कहा कि मैं पुतली से शादी कर रहा है तो हमें अचम्भा होना ही था।


अगस्त में एक दिन उन की शादी हो गई। गांव में इस की चर्चा रहीं। शादी के बाद गंगू पहले से भी अधिक चुपचाप रहने लगा और पुतली से तो हमारा कोई संपर्क था ही नहीं। हमें उन के जीवन के बारे में कुछ भी पता नहीं लगा। शरू में जरूर उस के बारे में कई बातें की गई, उन पर चर्चा हुई, और फिर उन्हें भुला दिया गयां। समय के साथ इस में जो थोड़ी बहुत रुचि थी वह भी समाप्त हो गई। पुतली एक सामान्य घरू पत्नी बन कर रह गई।


एक दिन दिसम्बर में गंगू और पुतली में फिर से रुचि पैदा हुई। आपस में कानाफूसी हो रही थी कि पुतली गाॅंव से गायब हो गई है। वह कहाॅं गई, पता नहीं। गंगू की हालत खराब थी। दिन भर इधर उधर घूमता रहता। खेत पर जाता तो वहाॅं काम न कर बैठा रहता। हम लोगें को उस से बहुत हमदर्दी हुई। उस की यह हालत देखी नहीं जाती थी। आपस में हम बात करते कि जिस तरह की लड़की थी, पुतली, यह सब तो होना ही था। शहर की है तो पता नहीं क्या क्या गुल खिलाये हों गे वहाॅं और अब फिर खिला रही हो गी। वह कहाॅं गाॅंव में फंस कर रह पाती। गंगू तो मूर्ख है। उसे पता होना चाहिये था। पर उस से बात करे कौन। एक बार बस उस से बात हुई। कहने लगा पता नहीं कहाॅं चली गई। कुछ कहा भी नहीं। मैं ने पूछा कुछ झगड़ा हुआ था क्या। उस ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं था। कभी उस ने कुछ नहीं कहा। अच्छा भला चल रहा था।


इस बीच गंगू कई बार शहर हो आया। शायद पुतली को डूॅंढने के लिये पर उस का कोई पता नहीं चला। पर आखिर गंगू ने उस का पता लगा ही लिया और उसे ले कर गाॅंव आया पर अब उस की गोद में दो महीने की बच्ची थी। फिर से गाॅंव में गपबाज़ी का सिलसिला चल पड़ा। न जाने किस का बच्चा है। गंगू की षादी को छह महीने भी नहीं हुये। हम लोग चाहे जो सोचते हों लेकिन गंगू उस के लौट आने से बहुत खुश था। उस की खुशी सारे गाॅंव वालों ने देखी और देख देख कर मन ही मन उस से हमदर्दी भी की।


जब वे दंपत्ति नगर से आया तो वे बातचीत करने के इच्छुक नहीं थे। पुतली दूसरी औरतों से भी बात नहीं कर रही थी। पर एक दिन वह दोनो, गंगू और पुतली, मुझे रास्ते में मिल गये। वास्तव में हम एक ही ओर जा रहे थे। उन्हों ने मुझ से बचने की कोशिश नहीं की थी। हम तीनों साथ-साथ कुछ दूर तक चले। तो भी बातचीत शुरू करना मुश्किल लग रहा था।


आखिर में गंगू ने ही कहा ’मैं जानता हूं कि आप क्या सोच रहे हो। हां, हमारे एक बच्चा हुआ, शादी के 6 महीने के अंदर। इसी लिये पुतली को बहुत बुरा लगा और वह मुझे छोड़ कर चली गई। भला ऐसा भी होता है कहीं’।


मुझे बड़ा संकोच हुआ कि क्या कहूॅ। पर उस ने ही कहा ‘आप सोच रहे हो कि मैं ने वह बच्चा अपना कैसे लिया। आप क्या सोचते हो कि अगर मैं कोई खेत खरीदूॅं गा तो उस की फसल को इस लिये अस्वीकार कर दूं गा कि वह किसी दूसरे ने बोई थी’। इस के बाद वह मुस्कुराया और उस क्षण मेरे मन में उस के बारे में एक अजीब सी श्रद्धा पैदा हुई। बच्चे को मैं ने अपनी गोद में ले लिया और उसे प्यार कर, सगन की राशि के साथ, पुतली की गोद में दे दिया। इस बारे में ना तो फिर कभी उन्हों ने बात की और ना ही मेरी कभी उन से बात करने की हिम्मत हुई।


1 view

Recent Posts

See All

एक दिन की बात

एक दिन की बात पहले मैं अपना परिचय दे दूॅं, फिर आगे की बात हो। मैं एक अधिकारी था, दिल्ली से बाहर नियुक्ति थी पर घर दिल्ली में था। आता जाता रहता था। मैं कुंवारा था और उस स्थिति में था जिसे अंग्रेज़ी में

a bedtime story

a bed time story a friend opined that telling the children fairy stories and stories about jinns etc. is wrong. the constitution enjoins that we should have scientific temper and these stories generat

the dream

the dream july 2021 this morning i had a strange dream. it was year 2050 or 2060. i should have been 110 or 120 but i did not feel like it. i felt as if i was thirty. just then a woman came in who loo