20 जुलाई की याद में
- kewal sethi
- Aug 1
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20 जुलाई की याद में
जैन ज़ेड के पोस्ट सब को आते पसंद
पर मैं तो उम्र रसीदा हूं और हूॅं स्वछन्द
हम ने भी अपने समय में दुनिया संवारी थी
परन्तु इस में मानवता पर नज़र हमारी थी
परिवार में एकता बनाये रखना बात खास थी
और व्यापार में केवल मूल्य ही तो साख थी
विश्व में एक संतुलन रखने की हम ठाने थे
नई खोज नये इरादे थे पर संस्कार पुराने थे
हम भी विद्रोही थे पर अशलील बन न पाये
बड़ों का विद्वानों का निरादर कभी कर न पाये
और अब
गढ़ी जा रही है उम्र का एक नई परिभाषा
जवान है हम, हमारी बड़ी सी है अभिलाषा
दुनिया बदल न सकें पर इरादे तो बुलंद हैं
नहीं गुलाम किसी के हम अब स्वछन्द हैं
हमें अधिकार है हम चाहें जिधर भी जायें
इन पुराने उम्र रसीदाओं को रास्ते से हटायें
हम जैन ज़ैड हैं अपनी तरह जीना दस्तूर है।
इस में कोई भी रूकावट हमें नामंज़ुर हैं
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