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 हिन्दु धर्म की रक्षा

  • kewal sethi
  • May 28
  • 3 min read

 हिन्दु धर्म की रक्षा


कहते हैं जब रोम जल रहा था तो नीरू बंसी बजा रहा था। 

उस समय कोई व्यक्ति नीरू के पास गया और उसे कहने लगा -

- रोम जल रहा है और तुम बंसी बजा रहे हो। 

नीरू ने जवाब दिया - 

- क्या मेरी बंसी को बन्द करने से आग बुझ जाये गी। आग तो तभी बुझे गी जब रोमवासी इसे बुझाने का प्रयास करें गे। दूसरों के भरोसे रहने से तो वह फैले गी ही, कम नहीं हो गी। 


बात सही है। स्वयं के भरोसे पर रहना ही भाग्य को बदल सकता है। 

कहा जाता है गज़वा ए हिन्द आखिर भारत को ले डूबे गा। 

हो सकता है पर इसे बचाना तो भारतीयों का ही दायित्व हैं। दूसरे तो मदद करने आयें गे नहीं। 

पर करे कैसें? 

इसे हिन्दू राष्ट्र बनाने सेे काम चल सकता है क्या? 

शायद हॉं, शायद नहीं। 


दो रास्ते हैं। एक मुकाबले के लिये तैयार होना जिस में हर व्यक्ति को तैयार करना पड़े गा ताकि मौका आने पर वह खुद की तथा भारत की रक्षा कर सके।

दूसरे हिन्दु धर्म का विस्तार करना हो गा ताकि वह पूर्ण बहुमत में रहे। उस के लिये एक रास्ता वह है जो आर्य समाज ने चुना था - शुद्धि का रास्ता या जिसे आजकल घर वापसी भी कहा जाता है। बिछड़े हुओं को वापस लाया जाये। इस के लिये हिन्दु धर्म को अपना दृष्टिकोण बदलना हो गा। कई मंदिरों में अब यह कहा जा रहा है कि गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। इस के बदले कहना हो गा - जिस की राम में श्रद्धा है, उस का स्वागत है। राम में या कृष्ण में या सरस्वती मे या किसी भी देवी देवता में या भारत माता में। मतलब जो हिन्दु धर्म के मौलिक सिद्धॉंत को मानता है कि कर्म ही तय करते हैं कि मनुष्य कैसा है और कर्मफल मिलता ही है। उस में कोई पैगम्बर, कोई मसीहा, कोई व्यक्ति मदद नहीं कर सकता है। और यह कर्मफल इस जीवन में नहीं तो अगले जीवन में मिले गा। हिन्दु धर्म में प्रवेश को सरल तथा उपयुक्त बनाना हो गा। सारांश में जो गायत्री मन्त्र जानता है, और मौलिक बिन्दुओं में आस्था रखता है, वह हिन्दु है। जैसे कलमा जानना किसी धर्म के लिये ज़रूरी है, वैसे ही गायत्री मंन्त्र जानना ही हिन्दु धर्म के लिये काफी है। नाम परिवर्तन की आवश्यकता भी नहीं है। ईसाई मत वाले इसी से धोका देते हैं। नाम जगतमोहन पर धर्म ईसाई। पंजाब के मुख्य मन्त्री थे ईसाई पर नाम में सिंह था और उस पर से वह अनुसूचित जाति में भी थे, यह दावा था। 

यहॉं एक उल्लेख करना आवश्यक है कि हिन्दु धर्म ने पूर्व काल में अपने अन्दर दूसरों को सन्निहित करने पर कभी चिन्ता नहीं कीं। शक, हूण, यूनानी क्षत्रप हिन्दु पैदा नहीं हुये पर हिन्दु ही थे। जैसे वीर सावरकर ने कहा जिन की मातृभूमि भारत में श्रद्धा है, वह हिन्दु हैं। 

यह ही एक मात्र समाधान लगता है हिन्दु धर्म की रक्षा का। परन्तु इस में एक बाधा है। संविधान में यह सोच कर अल्पसंख्यों को कुछ विशेष अधिकार दिये गये शायद यह सोच कर कि इन से प्रभावित हो कर पाकिस्तान भी भारत का भाग बन सके गा। परन्तु अब दूसरे धर्म वालों को विशेष अधिकार देना बन्द करना हो गा। सभी भारतीय नागरिकों के लिये एक ही कानून, एक ही कायदा हो गा। हम सब भारतीय हैं। 


 
 
 

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