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सुहावना सफर

  • kewal sethi
  • Aug 11, 2020
  • 1 min read

सुहावना सफर


मुसूरी

ठंडी ठंडी हवायें

लम्बी लम्बी राहें

कुछ क्षणों की बोरियत भाषणों में

प्रश्नों की बौछाड़

कुछ चटपटे

कुछ अटपटे

फिर धन्यवाद, कुछ सधे शब्दों में

दूर

इन से बहुत दूर

लुधियाना की गर्म हवायें याद करती थीं

कुटप्पन के नुतृत्व में

काफिला चला

कुछ मुफत के लंच

कुछ फोकट के खाने

गर्म गर्म धूप में पच्चीस मील चल कर

पच्चीस सैकण्ड तक

रीपर को देखने के लिये

लेकिन भाषण

जन्म जन्म के साथी

फिर भी साथ रहे

लौट आये

उसी खुशी से जिस से चले थे


(मसूरी - जून 1971

लुधियाना के कृषि महाविधालय के अध्ययन दौरे से लौटने के पश्चात)

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