top of page
  • kewal sethi

सवेरे सवेरे

सवेरे सवेरे


- आज सण्डे है न?

- बिल्कुल, शनिवार के बाद आया है तो सण्डे ही हो गा।

- आज सर्दी है न?

- दिसम्बर में सर्दी नहीं हो गी तो और क्या हो गा।

- आज मैं रज़ाई से बाहर नहीं निकलने वाली।

- ऐसा क्या!

- कुछ समझे?

- नहीं तो

- आज चाय तुम्हें बनाना पड़े गी।

- चाय? मुझे? मैं ने कभी चाय बनाई है क्या?

- कभी न कभी तो शुरू करना ही हो गा। आज सही।

- अच्छा महारानी जी, जैसा हुकुम

- शाबाश

- कितना पानी रखना है पतीली में?

- दो कप चाहिये। एक मेरा, एक तुम्हारा

- लो हो गया। गैस भी जला दी।

- अरे, थोड़ा पानी और डाल दो।

- दो कप चाय पीना है क्या?

- नहीं, कुछ गर्म करने में, उबलने में उड़े गा न।

- ओ के। दुूध कितना डालूॅ।

- अन्दाज़ से डाल दो पर ज़्यादा नहीं डालना। स्वाद जाता रहे गा।

- और चाय पत्ती

- दो चमच

- कौन सा चमच? यहॉं तीन पड़े हैं अलग अलग साईज़ के।

- बीच वाला।

- ओ के। अखबार बाहर से उठा लूॅं न।

- ज़रूर।

- लीजिये श्रीमती जी, चाय तैयार है। पलंग पर ही बैठ कर पीजिये।

- थैंक यू। शुक्रिया, मेहरबानी। वाकई चाय का स्वाद आये गा।

- सुनो, यह तुम ने बूरा चीनी कब से लेना शुरू कर दी। अच्छी भली दानेदार चीनी होती थी।

- बूरा चीनी! वह कहॉं से मिल गई्र तुम को?

- चाय के डिब्बे के बगल में ही तो थी। पतंजली वाली शीशी में।

- वह डाली क्या?

- जी, बिल्कुल

- वह बूरा चीनी नहीं थी। नमक था।

- अरे! अब?

- तुम कुर्सी पर बैठ कर अखबार पढ़ो। मैं चाय बना कर लाती हूॅं।

10 views

Recent Posts

See All

पहचान

पहचान लड़का - मुझे पहचाना? लड़की - जी नहीं। - अरे, अभी तो मैं तुम्हारे पास से तीन बार गुज़र कर गया हूॅं। - सॉरी, तीन बार में पहचान थोड़ी ही बनती है। - अच्छा, फिर? - आठ दस बार चक्कर लगाना पड़ते हैं। - कोई ब

सहायक

सहायक यूॅं तो अमन भैया बहुत होशियार हैं। चुस्त चालाक, काम में भी आगे आगे और मदद करने में तो बहुत ही आगे। पर क्या करें, आजकल दुनिया इतनी बदल गई है कि पता ही नहीं चलता कि हम कहॉं हैं। साठ सत्तर साल में

What is wrong with Indian politics?

What is wrong with Indian politics? It is a bad question. Question should be what is right with Indian politics. But that is also not a good question. Why, because you will be stymied for an answer qu

Comments


bottom of page