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यक्ष प्रश्न

  • kewal sethi
  • Sep 29, 2021
  • 4 min read

यक्ष प्रश्न

सितम्बर 2021


ताल पर जल लाने चारों भाई यक्ष के प्रश्नों का उत्तर न देने के कारण जड़वत कर दिये गये।


तब युधिष्ठर को जाना पड़ा। यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने को वह तैयार हो गये। होशियार तो थे ही, बातें बनाना भी जानते थे। उन के उत्तर से यक्ष संतुष्ठ हो गया। एक भाई को जीवित करने के लिये तैयार हो गया। युघिष्ठर ने नुकुल को जीवित करने के लिये कहा।


अब मेरा यक्ष प्रश्न -

‘‘युध्धिठर ने नुकुल का नाम ही क्यों लिया?’’


अब आप कहें गे कि यह मेंरा यक्ष प्रश्न कैसे हुआ। यह बात तो यक्ष ने युधिष्ठर से पूछी थी और उन के उत्तर से प्रसन्न हो कर चारों भाईयों को जीवन दे दिया था।

क्या उत्तर था? कुन्ती का एक बेटा मैं जीवित हूॅं, इस कारण मादरी का भी एक बेटा जीवित होना चाहिये।

यही उत्तर दिया था न युधिष्ठर ने।

पर आप जानते हैं कि यह गल्त है। और यक्ष उस की चालाकी समझ गये और चारों भाईयों को जीवित कर दिया।

क्या था राज़?

मादरी की तो मृत्यु हो चुकी थी। पाण्डु की मृत्यु हो चुकी थी। मादरी के बेटे को जीवित करने से किस को संतोष हो गा।

इसी में इस प्रश्न के उत्तर की जटिल समस्या है जिस को सुलझाने के लिये यह यक्ष प्रश्न मैं ने पूछा है।


सही उत्तर क्या था?


एक बार महाभारत पढ़ जाईये। युधिष्ठर के चरित्र पर नज़र कीजिये। उस की निपुणता किस में थी। भीम गदायुद्व में माहिर थे। अर्जुन धुनर्विद्या में। सहदेव के बारे में कहा जाता है कि वह तलवार अच्छी चला लेते थे। साथ ही उन को घोड़ों की अच्छी पहचान थी। रह गये नुकुल। तो उन के किसी गुण का वर्णन नहीं आता। युधिष्ठर के किसी गुण को भी डूंढना पड़े गा। वह पहले पाठ - सत्य बोलो - से ही आगे नहीं बढ़ पाये। और वह भी ठीक से नहीं सीख पाये। प्रतियोगिता में जीनी हुई कन्या को वह भीेख में मिली वस्तु बताते हैं। धृतराष्ट्र को राजा मानते हैं पर उन के ज्येष्ठ पुत्र सुयोधन को युवराज नहीं मानना चाहते। अश्वथामा हतः कहते समय क्या उन्हें मालूम था कि इस नाम को कोई हाथी है भी कि नहीं। शायद नहीं। हाथी का नाम अश्वथामा होगा, यह साधारणत: नहीं होता। उन्हें कहा गया - ऐसा कहना है। उन्हों ने कह दिया। थोड़ी देर बाद अपने संतोष के लिये जोड़ दिया - मनुष्य या हाथी।

और देखिये।

जुआ ठीक से नहीं खेल पाते। हारते जाते हैं पर फिर भी बुद्धि काम नहीं करती। अपने भाईयों को अपनी सम्पत्ति मान कर दॉंव पर लगाते हैं। पॉंचों भाईयों की संयुक्त पत्नि को भी वस्तु मान कर दॉंव पर लगाते हैं। वह तो भला हो श्री कृष्ण का कि उन्हों ने लाज बचा ली नहीं तो युधिष्ठर ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

और अब नुकुल के बारे में प्रश्न।

सही उत्तर क्या है?

यदि एक ही भाई को जीवित होना है तो उसे होना चाहिये जो अपने अधिकार के रास्ते में न आये। शेष तीनों भाई तो किसी न किसी विधा में आगे हैं। वह खतरा बन सकते हैं। ऐसा जोखिम क्यों उठाया जाये। नुकुल से कोई खतरा नहीं है। इस कारण वही उपयुक्त साथी हो गा। आज भी सभी राजनेता नालायक को ही नेता चुनते हैं ताकि उन के इशारों पर नाचता रहे। अपने परिवार का हो तो अच्छा है नहीं तो कोई अयोग्य व्यक्ति ही ठीक रहे गा। कोई दूसरे नम्बर का नेता कभी पहले नम्बर का नेता नहीं बन पाता। गॉंधी ने सुभाष चन्द्र बोस के रास्ते में रोड़े अटकाये क्योंकि उन से भय लगता था। जो योग्य थे उन को अनदेखा कर नेहरू को आगे लाये। जब शास्त्री जी की मृत्यु हेई तो सिंडीकेट ने एक गुड़िया को सभी गणमान्य व्यक्तियों के मुकाबले में चुना। यह अलग बात है कि उस गुड़िया ने उन सब को ठिकाने लगा दिया। कामराज योजना में पंजाब के मुख्य मंत्री भगवन्त दयाल शर्मा हटाये गये तो उन्हों ने एक अनजाने से वकील बंसी लाल को आगे कर दिया कि वह कुर्सी को उन के लिये सम्भाल कर रखे गा। वहॉं भी चेला चीनी हो गया। गुरू गुड़ ही रहा। बहुत सारे ऐसे उदाहरण मिल जायें गे। पूर्व प्रधान मन्त्री का नाम ता ेलेना सही नहीं हो गा। वह तो विख्यात अर्थशास्त्री थे पर खतरा नहीं थे।

प्रतिभावान को आग मत आने दो, अपनी साख मिट्टी में मिल जाये गी - यह सिद्धॉंत सब स्थानों पर लागू होता है। हमारे विज्ञान के क्षेत्र में भी यह देखने को मिल जाये गा। अभी नम्बूदरी नारायण का किस्सा तो अखबारों में आ ही रहा है। तकनीकी अनुसंधान में हम कहीं ठहर नहीं पाते क्योंकि बात प्रतिभा को भुनाने की नही्र है, कुर्सी बचाने की है। अंधों में काना राज वाली कहावत के हम मुरीद हैं।

इस सदाबहार सिद्धॉंत के प्रणेता युध्ष्ठिर को माना जाये या नहीं, यह आप को निर्णय करना है।

और हॉं।

यक्ष समझ गये कि क्या चाल है। इस कारण सभी भाईयों को लौटा दिया। युधिष्ठर उस समय तो जानते नहीं थे पर उन भाईयों के कारण ही वह राजाधिराज बन सकेे।



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