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मोहबत का असूल

  • kewal sethi
  • Aug 1, 2020
  • 1 min read

मोहबत का असूल


गाड़ी नहीं है यह तो मोहब्बत का फूल है

एक्सरलेटर उतना दबाओ जितना असूल है


रास्ता उबड़ खाबड़ है तो गाड़ी को धीरे चलाना

अगर हो स्पीड ब्रेकर तो बेहतर होगा रुक जाना

खाली हो गाड़ी कभी तब भी उसे मत भगाना

अच्छा होता है आराम से आना आराम से जाना

चलती रहे तभी गाड़ी रुक जाए तो रस्ते की धूल है

गाड़ी नहीं है यह तो मोहब्बत का फूल है


अगर हो बी पी तो मत बेकार जोखिम उठाओ

निकलता हो जो कोई आगे तो मत ज़ोर लगाओ

अपने दिल को मत यूं ही ग़म में उलझाओ

जियो और जीने दो के सिध्दांत को अपनाओ

अपनी कमज़ोरी को न पहचान पाना भूल है

गाड़ी नहीं है यह तो मोहब्बत का फूल है


अठारह दलों का यह समूह है इसे मत भूल जाओं

जितना कदम बढ़ सकता है उतना ही तुम बढ़ाओ

सरस्वती वन्दना, वन्दे मात्रम को अभी मत उठाओ

निभ सकती है जिस तरह वैसे तुम अभी तो निभाओ

वक्त के पहले कोई कदम उठाना फ़ज़ूल है

गाड़ी नहीं है यह तो मोहब्बत का फूल है

(यह कविता आगरा से दिल्ली जाते समय एक टैम्पो के पीछे लिखे हुए वाक्य पर से बनाई गई।

पहली दो स्तरें इस वाक्य की हैं।

तीसरे पैरा में श्री बाजपेयी की सरकार से अनुरोध किया गया है - १६..११..९९)

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