top of page

नये ज़माने की कहानियॉं

kewal sethi
Mar 19
1 min read

Updated: Mar 20

नये ज़माने की कहानियॉं


इस बार केन्द्रीय सविचालय पुस्तकालय से श्री दिव्य प्रकाष दुबे की कहानी संग्रह ‘‘षर्तें लागू’’ ले आया।

इस के बारे मे ंदैनिक जागरण ने लिखा, ‘‘दिव्य प्रकाष तथा उन की भाषा दोनों जवान हैं। ’’

आउटलुक ने टिप्पणी दी, ‘‘दिव्य प्रकाष नये ज़ाने की कहानिष्ॅं लिखते हैं’’।

और मैं भी नये ज़माने के साथ चलना चाहता हूॅ।

इस लेख में ो एक बातें आधुनिकता की बताना एचित हो गा।

1. याद है तुम्हे थोड़ा भी, जिस दिन हम ने पहले बच्चे का नाम सोचा था। तुम ने उस को आने ही नहीं दिया। कैरियर इतना इम्पार्टम्ैंट होता है क्या। (पृष्ठ 9)

2. दीक्षित का बहु से चक्कर है (सैलून) तो प्रतीक का मैडम से (आस्क एक्पर्ट)। पारुल का अपने बॉस से (टर्म्स एण्ड कंडीषन्स एप्पलाई)। नम्रता पर उस का बॉस सम्बन्ध बनान चाहता है (रूम नम्बर 303)। मकान मालिक का सविता से (लैट अस गो होम) लोलिता का अपने इंगलिष वालेे अध्यापक से (लोलिता)। लगता है चक्कर होना ही आधुनिकता की पहचान है।

3. एक और विशेषता - अपने काम में परफैक्ट। थोड़ा चिल्लना पड़े तो चिल्ला भी लेती थी। कभी नीचे वाले को गाली देना पड़े तो गाली भी दे लेती थी। (रूम नम्बर 303)। उस ने मेरे से ज्त्रयादा पैग पिये और फिर सास, ससुर, पति को तथा आफिस में जो बड़े बॉस थ, उन सभ्ी को लाखों माूं बहन की गालियां दीं। (रूम नम्बर 303)

Recent Posts

See All
whaling

whaling catching the whales and utilising its rich dividends is as old as can be. according to wikipedia, it is recorded in korea in 6000 bc. but it really grew in volume when bigger ships came in w

 
 
 
महापुरुष गॉंधी

महापुरुष गॉंधी अप्रैल 2020 एक लेख में मैं ने कुछ देशों के स्वतन्त्रता संग्राम सैनिकों की जेल यात्रा के बारे में लिखा था जिस में नैलसन मण्डेला, लोकमान्य तिलक, सुकारनों तथा गॉंधी जी की बात की थी। दूसरे

 
 
 
वेश्यावृत्ति का अर्थशास्त्र

वेश्यावृत्ति का अर्थशास्त्र (यह स्टीवन डी. लेविट और स्टीफन जे. डबनर की किताब "सुपर फ्रीकोनॉमिक्स" में दिये गये विवरण पर आधारित है।) इसकी शुरुआत शिकागो में वेश्यावृत्ति पर चर्चा से होती है। सुधीर वेंकट

 
 
 

Comments


bottom of page