top of page

धन्यवाद ज्ञापण

  • kewal sethi
  • Mar 6
  • 1 min read

धन्यवाद ज्ञापण


एक तरह से देखा जाये तो गोडसे को धन्यवाद दिया जाना चाहिये कि उन्हों ने गांधी के सपने को साकार कर दिया।

एक बार गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान मेरी लाश पर बने गां। पाकिस्तान तो बन गया पर लाश नहीं बनी। नवाखली में कुछ दिन और रह जाते तो उन का सपना पूरा हो जाता। पर शायद यम देवता को वह जगह रास नहीं आई या फिर सरकार ने सोचा कि नवाखली तो पाकिस्तान में हो गा। साल में दो बार जन्म दिन पर और मरन दिवस पर पाकिस्तान सरकार की अनुमति ले कर जाना पड़े गा। इस लिये उन्हें दिल्ली लाया गया।

नोट करें कि उन्हे साबरमती आश्रम नहीं ले जाया गया जो उन का प्रिय स्थान था। वहॉं भी श्रद्धॉंजलि देने में थोेड़ी दिक्कत तो आती ही क्योंकि सरकार तो दिल्ली में थी। साथ ही आगुन्तक विदेशी सम्मानित महत्वपूर्ण अतिथि गण को भी असुविधा होती।

दिल्ली में वह बालमीक कालोनी में दो दिन रुके। पर यह जगह पहाड़गंज, नबी करीम और करोलबाग के बहुत पास थी। सरकार ने उन की सुरक्षा के लिये उन्हें अत्यन्त सुरक्षित स्थान नई दिल्ली पहुंचा दिया।

ऐसे में गोडसे को थोड़ी तकलीफ तो हुई हो गी पर उसे गांधी के सपने को साकार तो करना ही था। जो उस ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुये किया।

बाकी तो इतिहास है।

Recent Posts

See All
किस्सा एक वारदात का - 3

किस्सा एक वारदात का 3। और यह मामला। हुआ यह कि एक थे डा. वाडिया। अच्छे सुलझे हुए शल्य चिकित्सक थे। करीब 3 साल पहले जिले में आए थे। लंदन से एफ आर सी एस थे। हाथ अच्छा था। ऑपरेशन शायद ही कोई नाकामयाब

 
 
 
किस्सा एक वारदात का - 2

किस्सा एक वारदात का 2। इस स्टेज पर यह बताना आवश्यक है कि यह सब क्या है और क्यों है। इस के बिना पाठक को कुछ भी पल्ले नहीं पड़ रहा हो गा। पात्रों का परिचय दिये बिना कहानी शुरू करना नई परिपाटी है और हम ने

 
 
 
किस्सा एक वारदात का

किस्सा एक वारदात का हैलो ।....... हॉ., मै. बोल रहा हूॅ. .........हॉ. हॉ., कहिये ..........हैलो .... गुड मार्निगं सर, मै. शर्मा बोल रहा हूॅ. .......... जी सर .......... जी सर ..........ठीक है सर, मै.

 
 
 

Comments


bottom of page