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गुप्त दान

  • kewal sethi
  • Jan 27, 2023
  • 2 min read

गुप्त दान


‘‘सुनो, हरीश आया था’’।

- कौन हरीश?

- अरे, बद्री चाचा का बेटा।

- क्या काम था उसे

- काम का क्या मतलब। क्या बहन को मिलने नहीं आ सकता।

- जब पिछली बार यहाॅं रहे थे तब तो नहीं आया था और इस बार भी कई महीने हो गये हैं आये हुये। अब याद आई उसे बहन की।

- तुम को तो हमेशा मेरे मैके वालों से चिढ़ रहती है। और हाॅं वह मिठाई का डिब्बा भी लाया है।

- अच्छा, इतना प्रेम, लगता है दो चार रोज़ में फिर आये गा।

- उस का अपना घर है, आये तो अच्छा ही लगे गा।


और वाकई तीसरे दिन महाश्य फिर आ गये।

- कैसे हैं जीजा जी, आप से तो मिलना ही मुश्किल है।

- आओ, आओ, कैसे चल रही है दुकानदारी।

- बढ़िया है। बाज़ार का तो आप जानते ही हो।

- वह तो है पर कोई अड़चन तो नहीं है न।

- नहीं, पर ऐसा है कि इंस्पैक्टर ने एक चालान काट दिया है।

- अब यह तो दुकानदारी में होता ही रहता है। निपटा दो उसे कुछ दे दिला कर।

- वह तो मुश्किल नहीं है। पर ....

- पर क्या?

- यह जो नया कलैक्टर आया है, उसे आप जानते हो।

- जानता तो हूॅं। पर उस से क्या।

- बुरा मत मानिये गा, यह नया कलैक्टर बहुत सनकी है। जो इंस्पैक्टर महीने में चार छह चालान नहीं काटता है, उस के पीछे पड़ जाता है।

- तो?

- अगर आप सिफारिश कर दें तो

- अडल्ट्रेशन का ही मामला हो गा, कोई जेल थोड़े भिजवा दे गा। आठ दस हज़ार जुर्माना ही तो करे गा। इतना तो कमा ही लेते हो।

- पैसे की बात नहीं हेै वह तो इंस्पैक्टर को देते ही हैं। बदनामी होती है, और आप जानते ही हैं, बाज़ार में बदनामी का क्या मतलब है।

- फिर,

- बाज़ार में सब को बता रखा है आप के बारे में। लोग कहें गे, जीजा इतनी बड़ी पोस्ट पर है और फिर भी चालान कट गया। कैसा अफसर है। देख लीजिये। इस में आप की ही बदनामी है।

- उस से क्या अन्तर पड़ता है। पैसा दो, आराम से रहो। मेरी चिन्ता न करो।

- पैसे की बात नहीं है। बस चालान न हो, ऐसा करें। उतना पैसा तो मैं रैड क्रास में जमा करा दूॅं गा।

- ठीक है, पंद्रह हज़ार का एक चैक दे दो, फिर देखता हूॅं।

- अब यह चैक की बात? सीधे नकद जमा करा देता हूॅं।

- तो अब दान भी ब्लैक के पैसे से करो गे। या यह सोच रहे हो कि नकद दिया तो जीजा पैसा अपने पास रख ले गा।

- नहीं नहीं, ऐसा नहीं है। बाज़ार में सब आप को मानते हैं।

- पर पैसे का मोह है जो रोकता है चैक या नकद देने से

- ठीक है, दीदी को बताता हूॅं। वही तय करें गी।


और फिर गृह कलह से बचने के लिये सिफारिश की गई। पैसा कभी रैडक्रास में जमा हुआ या नहीं, क्या पता।

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