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  • kewal sethi

कहानी एक चीनी के टुकड़े की

यह कहानी मैं ने जाने कौन से मूड में और कौन से समय में लिखी थी। यह पक्का है कि उस समय मेरे पास कंप्यूटर नहीं था और इसे टाइपराइटर पर ही टाइप किया था। मतलब वह सत्तर की दशक (मेरी नहीं, शताब्दी की) की हो गी क्योंकि अस्सी की दशक में तो कम्प्यूटर आ गया था। पर जो हो, वह कहानी पेश हैं।


कहानी एक चीनी के टुकड़े की


एक दफा एक चींटी को एक चीनी का टुकड़ा मिला। उस ने उस को अपने घर ले जाना चाहा पर वे उसे हिला भी नहीं पाई. तब उस ने अपनी मदद के लिए एक दूसरी चींटी को बुलाया। लेकिन दोनों चींटियॉं मिल कर भी उस टुकड़े को हिला नहीं पाई। उधर से एक हाथी जा रहा था। चींटियों ने उस से प्रार्थना की ”हाथी भैया, हमारी मदद करो। यह टुकरा हम से उठ नहीं रहा’’। हाथी ने उन की बात मान ली और जोर लगाना शुरू किया लेकिन फिर भी वो टुकरा अपनी जगह से नहीं हिला। अब उन्हों ने अपनी मदद के लिए एक और हाथी को बुलाया। उस के आने से भी कोई लाभ नहीं हुआ तो उन्हों ने तीसरे हाथी को भी बुला लिया। तब तक चीटियॉं काफी थक चुकी थी। उन की पकड़ भी ढीली हो गई थी। जब तीनों हाथी एक दूसरे की दुम पकड़ कर खींच रहे थे तो एक चींटी से दूसरी चींटी की पकड़ छूट गई। इस से तीनों हाथी एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े। क्योंकि सब से पीछे वाले हाथी के ऊपर दूसरे दो हाथी गिरे थे, इस लिये वह हाथी एकदम कागज जितना पतला हो गया।


उस समय तेज हवा चल रही थी। इस लिए वह हाथी उड़ गया। जब हाथी उड़ा जा रहा था तो एक लड़के ने उस को देखा। वह लड़का पतंग उड़ा रहा था। उस ने हाथी को अपने डोर में फंसा लिया। हाथी पतंग के साथ साथ डोलने लगा। नीचे बहुत से लोग यह तमाशा देखने लगे। उन में एक कव्वा भी था। वह हाथी का दोस्त था। उस ने देखा कि हाथी को बहुत कष्ट हो रहा है तो उस ने छलांग लगाई और हाथी के पास पहुंच गया। उस ने हाथी से पूछा कि वह कैसे उस की मदद कर सकता है। हाथी ने उस से कहा कि उस का एक दोस्त चूहा है। वह अगर डोर को काट ले तो हाधी छूट सकता है। कव्वे ने तुरंत छलांग लगाई और भाग कर चूहे के पास गया। चूहा तुरन्त ही उस की मदद करने के लिए तैयार हो गया। पर उस ने कहा कि वह हाथी तक पहुंचे गा कैसे। कव्वे ने कहा कि वह उस की पीठ पर बैठ जाए। कव्ये न उसे बिठा का छलांग लगाई परन्तु चूहे को पीठ पर बैठने का अभ्यास तो था नहीं, वह रास्ते में ही गिर गया।


चूहा गिरा एक रेलगाड़ी के ऊपर। जिस का डिब्बा एकदम दब गया। वह डिब्बा मालगाड़ी का था इस कारण किसी की जान नहीं गई। लेकिन गाड़ी वहीं पर रुक गई और कई गाड़ियों का आना जाना. भी रुक गया। लेकिन चूहा एकदम उठ कर भाग गया। कव्वे ने काफी कोशिश की कि चूहा अपने दोस्त को बचाने के लिए मदद करें लेकिन अब चूहे ने साफ इंकार कर दिया।


एक दूसरे लड़के ने इस प्रकार पतंग को उड़ते देखा तो उस ने पतंग के साथ पेच लगा दिये। इधर कव्वा खबर देने के लिए पहुंचा ताकि हाथी को बता सके कि चूहे ने मदद करने से इंकार कर दिया है। जैसे ही कव्वा हाथी के पास पहुंचा, उस की पतंग कट गई। हाथी और कौवा दोनों नीचे गिर गए। हाथी तो गिरा एक नांव पर जो कि उस को लेकर बह गई। लेकिन कव्वा गिरा ठीक पानी के भीतर। एक दम पानी उछल कर सारे नगर में भर गया। सब लोग घबरा कर त्राहिमाम कर उठे। इधर नदी का पानी बाहर निकल जाने से नाव तल पर बैठ गई. हाथी उठ कर वहां से भागा। शहर में आया तो देखा सब तरफ पानी भरा हुआ है तो उस ने सारे का सारा पानी पी लिया और भागता भागता सागर के किनारे गया और सारा पानी उस ने उड़ेल दिया। इस से उस का शरीर भी पहले जैसा हो गया।


जब हाथी कव्वे के पास आया तो उस ने पूछा कि वह पतंग के ऊपर कर क्या रहा था। हाथी ने उसे बताया कि वह और उस के साथी चींटियों की मदद करने की को कोशिश रहे थे। अब कौवा और हाथी चींटियों की तलाश करने लगे। बड़ी मुश्किल से वे उन को मिली। उस ने बताया कि जब वह और उस के साथी उस टुकड़े को खींचने की कोशिश कर रहे थे तो एक मक्खी कहीं से उड़ते उड़ते आ गई और टुकड़े को उठा कर ले गई। अब कव्वे और हाथी ने उस मक्खी की तलाश करना शुरू की। मक्खी पहाड़ की एक ऊंची चोटी पर जा बैठी थी। उन्हों ने हिम्मत न हारी और उस पहाड़ पर चढ़ने लगे। लेकिन उन दोनों को पहाड़ पर चढ़ने का तजुर्बा तो था नहीं, इस लिए बड़ी कठिनाई हुई। कव्वा तो रास्ते में ही फिसल गया लेकिन हाथी हिम्मत कर के ऊपर तक चला गया। मक्खी उसे देख कर उड़ गई पर वह चीनी के उस टुकड़े को.वहीं पर छोड़ गई। अब हाथी ने उस टुकड़े को नीचे की ओर धकेलना शुरू किया। चीनी का टुकड़ा नीचे लुढ़कने लगा. धीरे धीरे उस की गति बढ़ती गई और वह बहुत तेजी से लुढ़कने लगा। लेकिन गलती यह हुई कि कव्वा उस के रास्ते की सीध में ही था। चीनी का टुकड़ा सीधा उस के ऊपर गिरा। इस से चीनी के चार टुकड़े हो गए। हाथी ने अपने साथियों को बुलाया और उन्हों ने तथा कौवे ने मिल कर उन टुकड़ों को चींटी के घर पहुंचा दिया।


चींटी ने सब को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया।


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