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  • kewal sethi

उखड़ी उखड़ी बातें

उखड़ी उखड़ी बातें


दिलेरी की जब भी बीवी से अनबन होती है तो उस का मूड उखड़ जाता है। ऐसे में घर में बैठना मुश्किल हो जाता है। बीवी से कुछ कहने सुनने का तो मतलब ही नहीं है। इस लिये वह घर से निकल लेता है और, वह कहते हैं न, आवारागर्दी करने लगता है। यानि कि बिना मतलब के किसी भी तरफ चल पड़ना। अब ऐसे में वह एक दिन घर से काफी दूर निकल आया।

तभी एक शख्स ने उस से कहा - भाई साहब, यह सड़क कहॉं जाती है।

दिलेरी तो उखड़ा हुआ ही था। बोला -

- सवाल यह नहीं है कि यह सड़क कहॉं जाती है। सवाल यह है कि तुम्हें कहॉं जाना है।

वह आदमी भी शायद कुछ उखड़ा उखड़ा सा था। कहने लगा

- यह मेंरा निजी मामला है।

दिलेरी - तो मैं कहॉं कहता हूॅं कि यह पब्लिक का मामला है। आप कहीं भी जायें, यह आप जानें। दूसरों को इस से क्या वास्ता।

- देखिये, मैं ने तो सीधा सा सवाल पूछा था कि सड़क कहॉ जाती है। आप क्या पुलिस अधिकारी जो जानना चाहते हो कि मैं कहॉं जाना चाहता हूॅं।

- तो क्या मैं इन्कवायरी कर्लक हूॅं जो बताता रहे कि कौन सी सड़क कहॉं जाती है।

- इस में दिक्कत क्या है। न बताना हो, मना कर दीजिये। नहीं मालूम, वैसा बोल दीजिये।

- बिना पूरी जानकारी के कैसे सवाल का जवाब दिया जा सकता है। मैं सरकारी आदमी हूॅं। हमें पूरी जानकारी के साथ ही जवाब देना होता है। और मना भी हम नहीं कर सकते हैं। आखिर यह डैमोक्रेज़ी है।

- तो आप सरकारी आदमी हैं। मैं पहले ही समझ गया था। आ।र आप ने क्रेज़ी होने का डैमो भी दे दिया। क्या करते हैं दफतर में, पता नहीं।

- जब एल डी सी था तो आवक जावक का काम देखता था। पत्र कहॉं से टाया, उस का विषय क्या हैं कौन सो बाबू उस से सम्बन्धित है, यह सब जान कर ही तो उस को दिया जा सकता है। बिना जानकारी के कैसे यह काम हो सकता है।

- तो आप एल डी सी हैं

- था। हूॅं नहीं। अभी प्रमोशन हो गई है। यू डी सी हूॅं। बहुत ज़िम्मेदारी का काम है। किसी फाईल पर नोट लिखने से पहले देखना होता है कि पहले ऐसा विषय आया था तो क्या कहा था। उस की फाईल डूॅंढनी पड़ती है। हवाला देना पड़ता है। तब जा कर फाईल आगे भेजते हैं। अब आप पहले कभी इस मौहल्ले में आये हों। तो पता चले कि कब आये थे, क्यों आये थे, तब आप के सवाल का जवाब दिया जा सकता है। या फिर अभी बता दें तो आगे के लिये रिकार्ड रखा जा सकता है ताकि आप जब पूछें तो जवाब दिया जा सके।

- अच्छा, बता देता हूॅं। मैं सीमा से मिलने आया हूॅं।

- अब इस से एक नहीं, तीन सवाल सामने आते हैं। एक - सीमा कौन है। दो - सीमा कहॉ रहती है। तीन - आप सीमा से क्यों मिलना चाहते हैं।

- पहले आप पुलिस अधिकारी लगते थे। कहॉं जाना है, क्यों जाना हैं। अब वकील बन गये हो। पूरी जिरह करना शुरू कर दिया। बस कसर यह रह गई कि तारीख देना बाकी है। पेशी दो सप्ताह के लिये बढ़ाई जाती है। फिर आना।

- फिर वही बात। अब फिर से बताऊॅं कि फाईल कैसे बढ़ती है।

- इस से बेहतर है कि मैं पूरी बात बता दूॅं। सीमा मेंरे मामा की बेटी हैं। उस की शादी किसी दिलेरी नाम के आदमी से हुई हैं। मैं बहन से मिलने जा रहा हूॅ। बस अब हो गई तसल्ली। अब रास्ता बता सकते है।

- यह हुई न बात साले जी। सड़क कहॉं जाती है से मतलब नही। मतलब तो मंज़िल से है।

- देखिये, आप को रास्ता नहीं बताना, न बताईये पर गाली देने का क्या मतलब है।

- गाली कौन दे रहा है।

- तो साला क्या गाली नहीं है।

- अरे भाई साहब, साला गाली नहीं है। यह प्यार मोहब्बत का सब से बड़ा रिश्ता है। कहा भी है सारी खुदाई एक तरफ, जोरू का भाई एक तरफ।

- मतलब?

- मतलब यह कि मैं दिलेरी हूॅं। सीमा मेरी बीवी है। आप मेरे साले हैं। आइ्रये, आप को अपने घर ले चलता हूॅं।



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