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  • kewal sethi

अड़तीस और छब्बीस

अड़तीस और छब्बीस


दिलेरी की बैठक में आज पता नहीं कैसे विषय अड़तीस और छब्बीस की ओर मुड़ गया। बहस इस बात पर थी कि 38 बड़ा होता है या 26। एक ने कहा सीधा से गणित है, इसे तीसरी कक्षा का बालक भी जानता है।

एक पढ़ाकू किस्म के लिपिक ने कहा - इस भरोसे मत रहना। एक असर नाम की संस्था ने अपनी रिर्पोट में बताया है कि साल 2022 में केवल 25.9 प्रतिशत तीसरी कक्षा के बच्चे घटाने के प्रश्न कर सकते थे। अब 38 बड़ा है या 26, इस पर गम्भीरता से विचार करना चाहिये क्योंकि देश का सवाल है।

एक ने कहा इस पर इस तरह सोचो कि जो 38 में पैदा हुआ, वह बड़ा है या जो 26 में पैदा हुआ। पूरी बात समझ में आ जाये गी। नाम बदलने से जन्म की तारीख नहीं बदलती।

बैठक में बात चीत के अतिरिक्त मूॅंगफली खाने का दौर भी चल रहा था जो सभी ने पचास पचास पैसे दे कर खरीद ली थी और अब बीचों बीच रखी हुई थी। एक एक दाना उठा कर सब खा रहे थे। एक ने अचानक कहा कि इस मूंगफली में से एक भी दाना नहीं निकला। दूसरे ने कहा मेरे वाली में दो की जगह एक ही दाना था।

वह लिपिक जिस में 38 और 26 की बात शुरू की थी, नाराज़ हो गया। बोला, हम सब बहुत सीरियस बात कर रहे है तो यह मूॅंगफली कहॉं से बीच में आ गई।

दिलेरी ने टोकते हुये कहा कि यह भी बहस का हिस्सा है। अब बताईये इन 38 में से कितनी है जिन में दाना नहीं है या जिन में नाम मात्र का दाना है। उन्हें निकाल दें तो 26 से कम हो जायें गे।

तीसरे ने कहा कि यह बात तो 26 के लिये भी कही जा सकती है। उन मे कितने एम के हैं।

चौथे ने कहा किस एम के बात कर रहे हो। उर्दू वाले अहमक की या तमिल नाडु वाले एम के की जैसे पी एम के, एम एम के वगैरा।

दिलेरी ने कहा कि कोई भी मान लो, एक ही बात है। और फिर यह तो लम्बा मैच है। इस में न केवल विरोधी को रोकना है बल्कि अपने पक्ष वालों की फटी में टॉंग अड़ाना भी शामिल हो गा। कौन किस के पक्ष में है और कौन विरोध में, यह भी पता नहीं चलता। सब की वर्दी एक ही है। 26 वालों को अपना रंग चुन लेना चाहिये। हरा, नीला, भगवा तो बाहर हैं। सफैद चुन नहीं पाते क्योंकि दाग ही दाग दिखें गे। काला तो मातमी रंग है। उस का समय बाद में आये गा।

एक ने कहा जोकर की तरह रंग बिरंगा लिबास होना चाहिये। आगे एक, पीछे दूसरा, साईड पर तीसरा। यही अच्छी पहचान रहे गी।

दिलेरी ने कहा कि एक बात ओर है कि शायद गोल की जगह ही बदल दी जाये जैसा कि हम कई बार सरकस में देखते हैं जब जोकर आपस में फुटबाल खेल रहे होते हैं। या फिर जयद्रथ की मृत्यु की तरह कोई माया चक्कर चलाया जाये।

मूॅंगफली खत्म होने के साथ बैठक भी खत्म हो गई। अगली बैठक का इंतज़ार करना हो गा।


(उर्दू - दाना - होशियार; अहमक - मूर्ख)

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