• kewal sethi

असली सरकार

here is the first of my poems.

many a time, people want to know, who is government. is it the minister? is it the secretary to government.

here is the answer.



1. असली सरकार


(14 वर्ष की सेवा के बाद निदेशक बन जाना चाहिये। मेरे प्रकरण में यह तिथि 1 मई थी। जब जून 77 तक आदेश नहीं हुये तो लोगों ने कारण जानना चाहा। इसी का उत्तर यहाँ दिया गया है। - दो सहायक आपस में बात कर रहे हैं।)


सेठी साहब डायरेक्टर बन गये

नहीं बने

बन गये

नहीं बने

क्यों, क्या हुआ, कैसे हुआ

क्या अपने जे एस से झगड़ पड़ा

और सी आर उस का बिगड़ गया

क्या मंत्री से उस की सटक गई

या परसनल में गाड़ी अटक गई

क्या कैबिनैट कमेटी तय न कर पाई

या फिर विजिलैंस ने है टाँग अड़ाई

क्या पी एम लंदन चले गये

या नियम ही हैं बदल गये

नहीं भई

ऐसा कुछ भी हुआ नहीं

कोई अप्रिय घटना घटी नहीं

फाईल पर एडवर्स नोट नहीं

डायरैक्टर बनने पर रोक नहीं

बस हुआ यह कि क्या बतायें

अब तुम से क्या छुपायें

सब मरहले तय कर लिये

सारे दस्खत प्राप्त कर लिये

लेकिन तभी ऐसी बात हुई

जिस से सब को मात हुई

असिसटैंट छुठ्ठी पर चला गया

फाईल को वह दबा गया

अब जब वह वापिस आये गा

फिर ही आडर्र निकल पाये गा

तब तक ई एम, पी एम के दस्खत हैं बेकार

सच है असिसटैण्ट ही है असली सरकार

(दिल्ली - जून 1977)



1 view

Recent Posts

See All

कहते हैं सो करते हैं

कहते हैं सो करते हैं अगस्त 2021 चलिये आप को जीवन का एक किस्सा सुनाये । किस्सा तो है काफी लम्बा, उस का हिस्सा सुनाये।। कमिश्नर थे और हो गया था एक साल से ऊपर। कब तबादला हो गा, इस पर थी सब की नज़र।। बैटा

आरसी का आदमी

आरसी का आदमी कामयाबी जब कभी चूमे कदम तुम्हारे दुनिया चाहे इक रोज़ बादशाह बना दे आरसी के सामने खड़े हो आदमी को देखना और सुनो गौर से कि क्या है वह कह रहा शोहरत माॅं बाप बीवी के म्याद पर उतरे पूरी क्या ख्य

तलाश खुशी की

तलाश खुशी की पूछते हैं वह कि खुशी किस चीज़ का नाम है। खरीदना पड़ता है इसे या फिर यह सौगात है।। मिल जाती हे आसानी से या पड़ता है ढूॅंढना। चलते फिरते पा जाते हैं या पड़ता है झूझना।। क्या हैं इसकी खूबियाॅं,